बिहारशरीफ में चला नगर निगम का पीला पंजा, बिना नोटिस तोड़फोड़ करने का आरोप!
बिहारशरीफ में नगर निगम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर सड़क किनारे लगे ठेले, बैनर और करकट समेत अन्य अतिक्रमण हटाए। कार्रवाई के दौरान एक दुकानदार ने बिना नोटिस तोड़फोड़ का आरोप लगाया, जबकि नगर आयुक्त ने दावा किया कि 24 घंटे पहले माइकिंग कर सूचना दी गई थी।


नालंदा/बिहारशरीफ। बिहारशरीफ शहर में सोमवार को नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस दौरान सड़क किनारे और फुटपाथ पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए नगर निगम की टीम ने कार्रवाई की। ठेले, बैनर, करकट और सड़क किनारे लगाए गए अन्य अस्थायी ढांचों को हटाया गया।
नगर निगम की कार्रवाई शुरू होते ही इलाके में हड़कंप मच गया। अभियान का उद्देश्य सड़क को अतिक्रमण मुक्त कर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना बताया गया। अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमण के कारण कई स्थानों पर सड़कें संकरी हो गई थीं और लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी।
दुकानदार ने लगाया बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप
कार्रवाई के दौरान स्थानीय दुकानदार मोहम्मद सोहेल अबल ने नगर निगम की टीम पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उनकी दुकान नाली के पीछे स्थित है और उन्हें जगह खाली करने को लेकर कोई नोटिस नहीं दिया गया था। दुकानदार के मुताबिक, नगर निगम की टीम अचानक मौके पर पहुंची और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उन्होंने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पहले सूचना दी जाती तो वे आवश्यक सामान हटा सकते थे।
वहीं, बिहारशरीफ नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन ने दुकानदार के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम की ओर से कार्रवाई से पहले लोगों को पर्याप्त सूचना दी गई थी। नगर आयुक्त के मुताबिक, भराव पर से लेकर लहेरी थाना तक माइकिंग कराकर 24 घंटे पहले अतिक्रमण हटाने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद जिन लोगों ने निर्धारित जगह खाली नहीं की, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
ठेले और बैनर समेत कई अतिक्रमण हटाए गए
नगर निगम की टीम ने अभियान के दौरान सड़क और फुटपाथ पर लगे ठेले, बैनर, करकट और अन्य अस्थायी अतिक्रमण को हटाया। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण के कारण आम लोगों को परेशानी होती है, इसलिए अभियान चलाकर रास्ते को खाली कराया गया। नगर निगम की कार्रवाई के दौरान टीम के साथ संबंधित कर्मचारी और अधिकारी भी मौजूद रहे। अभियान के बाद सड़क के किनारे की जगह को खाली कराया गया।
एक ओर नगर निगम का कहना है कि अतिक्रमण हटाने से पहले माइकिंग के जरिए सूचना दी गई थी, वहीं दूसरी ओर कुछ दुकानदार कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में मामला नगर निगम और दुकानदारों के अलग-अलग दावों के बीच उलझ गया है। फिलहाल नगर निगम की ओर से शहर के अन्य अतिक्रमित इलाकों में भी अभियान जारी रखने की संभावना है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में कार्रवाई को लेकर दुकानदारों की ओर से विरोध बढ़ता है या नगर निगम का अभियान इसी तरह जारी रहता है।
(नालंदा से वीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट)

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