विधायक सुरेश बैठा की सलाह, असम चुनाव को लेकर झामुमो के रुख पर पहल करें आला कमान
रांची : असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच बात नहीं बनी। झारखंड में भले ही यह दोनों राजनीतिक दल गठबंधन में है।लेकिन असम में उनके रास्ते अलग-अलग होंगे। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने 21 सीट पर चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ कैंडिडेट के नाम की लिस्ट भी जारी कर दी है।

कांग्रेस विधायक सुरेश बैठा का मानना है कि अभी भी समय है। आला कमान को इस स्थिति को देखना चाहिए। सीटों को लेकर बातचीत करनी चाहिए और झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी हट धर्मिता नहीं करनी चाहिए।
वहां झारखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के चुनावी मैदान में उतरने से कांग्रेस पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा और झारखंड में गठबंधन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। झारखंड में गठबंधन मजबूत है। असम की भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकना ही दोनों पार्टियों का उद्देश्य है।
वहीं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने झारखंड कांग्रेस और सरकार पर जमकर हमला बोला है।ऐसे में कांग्रेस का मानना है कि उनके बयान पर आला कमान निर्णय लेगी। वही ओबीसी के खिलाफ पार्टी के कार्रवाई के सवाल पर खड़े हो रहे हैं। विपक्ष की भारतीय जनता पार्टी भी हमलावर है।इस पर कांग्रेस विधायक सुरेश बैठा ने कहा है कि इसमें कोई ओबीसी का मामला नहीं, बल्कि अनुशासन का मामला है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को इस पर बोलने का हक नहीं है। उन्हें अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए। जिन्होंने ओबीसी आरक्षण को घटाकर आधा कर दिया है। भाजपा ओबीसी को फ्रंट लाइन में बैटिंग करा कर राज करती हैं। योगेंद्र साव और उनका परिवार पार्टी के दुश्मन नहीं है। पार्टी ने मान सम्मान दिया है। लेकिन आला कमान के खिलाफ जाने पर कार्रवाई होती है।
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