गाड़ी लेने के लिए 1.10 लाख का लोन पड़ा भारी!, चेक बाउंस मामले में रांची कोर्ट ने दी 1 साल जेल और भारी जुर्माने की सजा
रांची में 1.10 लाख रुपये के वाहन लोन से जुड़े चेक बाउंस मामले में अदालत ने किशुन महतो की अपील खारिज कर एक साल की जेल और चार लाख रुपये मुआवजे की सजा बरकरार रखी।

Cheque Bounce Case ; रांची में चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को तगड़ा झटका दिया है। न्यायायुक्त अनिल मिश्रा-1 की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी किशुन महतो की अपील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा पूरी तरह जायज है और इसमें कोई राहत नहीं दी जा सकती।
जेल की सजा बरकरार और जमानत रद्द
अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले पर मुहर लगा दी है जिसमें आरोपी को एक साल की साधारण जेल और चार लाख रुपये का मुआवजा भरने की सजा सुनाई गई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी की अंतरिम जमानत भी तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी। कोर्ट ने किशुन महतो को कड़ा आदेश देते हुए कहा है कि वह पंद्रह दिनों के भीतर निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करे और अपनी सजा काटे।
वाहन लोन से जुड़ा था पूरा विवाद
यह पूरा मामला जटिन्द्रा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (जो अब वेदिका फिनकॉर्प के नाम से जानी जाती है) से लिए गए वाहन लोन से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी किशुन महतो ने साल 2019 में कंपनी से गाड़ी खरीदने के लिए 1.10 लाख रुपये का लोन लिया था।
खाते में पैसे न होने से फंसा पेंच
लोन की बकाया रकम चुकाने के लिए आरोपी ने कंपनी को 12 मई 2023 की तारीख का 2,75,196 रुपये का चेक सौंपा था। जब कंपनी ने इस चेक को बैंक में क्लियरेंस के लिए लगाया, तो खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद मामला अदालत की चौखट पर पहुंचा, जहां लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी फैसला सामने आया है।
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