झारखंड के 13 हजार करोड़ के राजस्व पर संकट!, JMM प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने दी पंचायत स्तर पर आंदोलन की चेतावनी
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने राज्य के खनिज और वित्तीय अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है।


Jamshedpur: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने राज्य के खनिज और वित्तीय अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। रविवार को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिज संसाधन पूरे देश के औद्योगिक विकास में रीढ़ की हड्डी की तरह योगदान देते हैं। हालांकि, इन खनिजों के खनन से पैदा होने वाले विस्थापन, भारी प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का दंश सिर्फ और सिर्फ झारखंड की जनता को झेलना पड़ता है। ऐसे में खनिज राजस्व से जुड़े राज्य के अधिकारों को सीमित करना झारखंड के साथ सीधा आर्थिक अन्याय है।
MMDR संशोधन कानून 2026 पर खड़े किए गंभीर सवाल
कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन (MMDR) संशोधन कानून 2026 को लेकर केंद्र की नीतियों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के लागू होने से राज्यों की खनिज युक्त भूमि पर टैक्स, सेस (उपकर) और अन्य लेवी लगाने की संवैधानिक शक्तियां बुरी तरह प्रभावित होंगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस बदलाव का कड़ा विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी केंद्र सरकार से इस कानून पर तत्काल पुनर्विचार करने की औपचारिक मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और हजारों करोड़ के राजस्व का दिया हवाला
JMM प्रवक्ता ने जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि शीर्ष अदालत ने खनिज युक्त भूमि को राज्य की भूमि की श्रेणी में माना है। इसी के आधार पर झारखंड विधानसभा ने मिनरल बेयरिंग लैंड सेस कानून पारित किया था। उन्होंने आंकड़ों के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से राज्य को मिलने वाला राजस्व झारखंड के विकास के लिए जीवनदायिनी है। आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 1,379 करोड़, 2025-26 में लगभग 7,488 करोड़ और 2026-27 में करीब 13,215 करोड़ रुपये का अनुमानित राजस्व मिलना तय है, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास और खनन प्रभावित विस्थापितों के पुनर्वास पर खर्च किया जाना है।
मांगें न मानी गईं तो पंचायत स्तर तक होगा जनआंदोलन
कुणाल षाड़ंगी ने स्पष्ट शब्दों में केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि झारखंड के खनिज और वित्तीय अधिकारों पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो पार्टी इस आंदोलन को व्यापक रूप देगी और इसे जिलों से लेकर प्रखंड व पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड अपने प्राकृतिक संसाधनों के देशहित में इस्तेमाल के कतई खिलाफ नहीं है, लेकिन राज्य के संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों की बलि देकर कोई भी केंद्रीय व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार को सभी खनिज उत्पादक राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर उनके वित्तीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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