चुट्टूपालू घाटी में अवैध स्टोन माइनिंग पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, जांच के लिए बनाई हाई लेवल टीम
झारखंड हाईकोर्ट ने चुट्टूपालू घाटी में स्टोन माइनिंग और स्टोन क्रशिंग गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की है।

Jharkhand High Court: चुट्टूपालू घाटी में स्टोन माइनिंग और स्टोन क्रशिंग गतिविधियों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने अब तक पेश की गई रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कहा कि उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक उच्चस्तरीय टीम गठित करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने जांच टीम को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
किन मुद्दों की होगी जांच?
अदालत ने निर्देश दिया है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाए कि चुट्टूपालू घाटी में चल रहे स्टोन माइनिंग और स्टोन क्रशिंग यूनिट वैध हैं या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि इन इकाइयों के पास सभी जरूरी खनन और पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां हैं या नहीं।
कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि संबंधित विभाग और निगरानी एजेंसियां अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन कर रही हैं या नहीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने SIA काउंसिल की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए और उसकी गुणवत्ता पर नाराजगी जताई।
कौन-कौन होंगे जांच टीम में?
हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय टीम में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, SIA, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और खनन विभाग के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
21 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
अदालत ने टीम को क्षेत्र का भौतिक निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि क्षेत्र में कितने स्टोन माइनिंग और स्टोन क्रशिंग यूनिट संचालित हो रहे हैं, उनके पास वैधानिक और पर्यावरणीय मंजूरी है या नहीं, तथा निगरानी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियां सही ढंग से निभा रही हैं या नहीं।
हाईकोर्ट ने जांच टीम को 21 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर 24 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत आगे का फैसला करेगी।
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