जयराम महतो ने स्वास्थ्य मंत्री से की मुलाकात, कहा- 'खुद नहीं गए तो मैं लेकर जाऊंगा'
JPSC-JSSC आंदोलन के बीच जयराम महतो ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से मुलाकात कर आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की स्वास्थ्य जांच और धरना स्थल पर संवाद की मांग की। उन्होंने कहा, खुद नहीं गए तो लेकर जाऊंगा।

JPSC-JSSC: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच डुमरी विधायक जयराम महतो ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से अहम मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का मुद्दा पूरी गंभीरता के साथ उठाया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि वे बिना किसी देरी के अभ्यर्थियों से सीधे बातचीत करें और उनके स्वास्थ्य का जायजा लें।
'मंत्री होने के साथ आप एक डॉक्टर भी हैं'
जयराम महतो ने बातचीत के दौरान इरफान अंसारी को उनके पेशे की याद दिलाते हुए कहा कि वे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री होने के साथ-साथ पेशे से एक डॉक्टर भी हैं। ऐसे में यह उनका दायित्व बनता है कि वे खुद प्रदर्शन स्थल पर जाएं और आंदोलनरत अभ्यर्थियों से मिलें। विधायक ने मंत्री से यह भी अपील की है कि वे अपने साथ एक पूरी मेडिकल टीम लेकर धरना स्थल पर पहुंचें, ताकि पिछले कई दिनों से लगातार आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे युवाओं की बारीकी से स्वास्थ्य जांच की जा सके और उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल सके।
संवाद से ही निकलेगा समाधान
मुलाकात में जयराम महतो ने इस बात पर खास जोर दिया कि JPSC और JSSC के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर पिछले काफी समय से कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में राज्य सरकार की ओर से उनसे सीधे तौर पर संवाद किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से जल्द से जल्द प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर अभ्यर्थियों की समस्याएं और उनका पक्ष सुनने की अपील की, ताकि इस पूरे गतिरोध का कोई उचित समाधान निकाला जा सके और छात्रों को न्याय मिल सके।
'नहीं गए तो खुद लेकर जाऊंगा प्रदर्शन स्थल'
इस दौरान जयराम महतो ने स्वास्थ्य मंत्री को दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर स्वास्थ्य मंत्री खुद अपनी पहल पर आंदोलनकारी अभ्यर्थियों से मिलने नहीं जाते हैं, तो वह स्वयं उन्हें अपने साथ प्रदर्शन स्थल तक लेकर जाएंगे। महतो ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि कड़ाके की धूप और बारिश के बीच अपने हक के लिए लड़ रहे राज्य के युवाओं की स्थिति को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए उनसे बातचीत कर समाधान की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।
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