युद्ध खत्म करने की ईरान ने रखी 3 शर्तें, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा- US-इजरायल से जंग तभी रुकेगी
ईरान के राष्ट्रपति ने पेजेशकियन ने अमेरिका-इजरायल से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए 3 बड़ी शर्तें रखी हैं. उन्होंने कहा कि ईरान के "वैध अधिकारों" को मान्यता देना, युद्ध में हुए नुकसान का हर्जाना देना और भविष्य में होने वाले किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतर्राष्ट्रीय गारंटी देना है.

US Israel Iran War: पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इन दिनों अमेरिका-इजराएल और ईरान युद्ध का असर दिखाई देने लगा है. गैस और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी है. वैश्विक बाजारों में महंगाई की आशंका भी गहराने लगी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट है) में लगातार बढ़ते तनाव और पाबंदियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है. जिससे ऊर्जा आपूर्ति दबाव भी बढ़ने लगा है. इन सबके बीच अब ईरान ने खुलकर बयान जारी किया है कि किन शर्तों पर अमेरिका और इजरायल से जंग खत्म करने को तैयार है.
दरअसल, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिका-इजरायल से युद्ध समाप्त करने का एकमात्र तरीका ईरान के "वैध अधिकारों" को मान्यता देना, युद्ध में हुए नुकसान का हर्जाना देना और भविष्य में होने वाले किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतर्राष्ट्रीय गारंटी देना है. ईरान ने कहा कि अगर उनकी तीनों शर्तों मान लिया जाएगा तो, वे तेहरान जंग खत्म करने को तैयार है.
पेजेशकियन ने अपना यह बयान सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट साझा किया जिसमें लिखा है. ''रूस और पाकिस्तान की सरकारों के राष्ट्रपतियों के संपर्क में रहते हुए, मैंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के प्रति इस्लामी गणराज्य की प्रतिबद्धता की घोषणा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ज़ायोनी शासन और अमेरिका की यु्द्धोन्माद से शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने का एकमात्र तरीका ईरान के निर्विवाद अधिकारों को स्वीकार करना, हर्जाने का भुगतान करना और उनकी आक्रामकता को दोबारा होने से रोकने के लिए एक दृढ़ अंतरराष्ट्रीय दायित्व निभाना है.''
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन यह भी कहा है कि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई से युद्ध की शुरुआत हुई है. इन मु्द्दों में जबतक कोई ठोस समझौता नहीं होता है तब तक युद्ध समाप्त करना संभव नहीं होगा. ईरान इन देशों के साथ अपने क्षेत्रीय सहयोगियों से लगातार संपर्क में है और अपने पक्ष में अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश में लगा है. आपको बता दें, ईरान की यह कूटनीतिक पहल ऐसे वक्त में आई है जब जंग दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है लेकिन फिलहाल इन देशों के बीच अब भी तनाव कम होने का कोई संकेत नजर नहीं आ रहा है. हालांकि तेहरान ने कहा है कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है लेकिन इसके लिए जवाबदेह जिम्मेदार देशों को ठहराया जाना आवश्यक है.
बता दें, यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को उस वक्त शुरू हुआ जब ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल ने एहतियाती हमला किया था. वहीं इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल के कई शहरों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए. साथ ही इराक, जॉर्डन और खाड़ी के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी ईरान ने अपना निशाना बनाया. ईरान के इन हमलों के बाद पूरे मध्य-पूर्व में भी तेजी से तनाव बढ़ा और हालात लगातार अधिक गंभीर होते जा रहा है. वहीं, विशेषज्ञों के मुताबिक, इस जंग का असर केवल सैन्य मोर्चे तक ही सीमित नहीं है बल्कि इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री माइनिंग और बढ़ते सैन्य तनाव की वजह से गैस और तेल टैंकरों की आवाजाही भी खासा प्रभावित हुई है जिसका वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ने लगी है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में महंगाई और भी बढ़ सकता है.
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