पटना में डेंगू से सिमडेगा के इंद्रदेव दास की इलाज के दौरान मौत
बिहार की राजधानी पटना में डेंगू का प्रकोप अब गंभीर और जानलेवा रूप लेता दिख रहा है।


Simdega: बिहार की राजधानी पटना में डेंगू का प्रकोप अब गंभीर और जानलेवा रूप लेता दिख रहा है। कुर्जी इलाके में रहने वाले 30 वर्षीय इंद्रदेव दास की मंगलवार को डेंगू संक्रमण के चलते मौत हो गई। मृतक कुर्जी स्थित एक निजी स्कूल में कार्यरत थे और मूल रूप से झारखंड के सिमडेगा जिले के निवासी थे। जानकारी के मुताबिक, बीते पांच दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए कुर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
लगातार गिरता गया प्लेटलेट्स, दोपहर में तोड़ा दम
अस्पताल में इलाज के दौरान इंद्रदेव दास का प्लेटलेट्स काउंट तेजी से नीचे गिरता चला गया। डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ और आखिरकार मंगलवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया। इस साल पटना जिले में डेंगू से मौत का यह पहला मामला सामने आया है। हालांकि, मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र मंडल का कहना है कि उन्हें फिलहाल इस मौत की औपचारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन मरीज की मौत डेंगू संक्रमण से ही हुई है या नहीं, इसकी स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कराई जाएगी।
पटना में 170 के पार पहुंचे मरीज, 24 घंटे में मिले 3 नए केस
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में पटना में अब तक डेंगू के 170 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बीते 24 घंटे के भीतर तीन नए मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। सिविल सर्जन ने बताया कि सितंबर और अक्टूबर के महीने में डेंगू का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, जिसे देखते हुए विभाग पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने दावा किया कि लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के कारण पूर्व के वर्षों की तुलना में इस बार स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। स्वास्थ्य कर्मी प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर 'फीवर मास सर्वे' कर रहे हैं और मरीजों के मिलने वाले स्थानों पर नियमित फॉगिंग कराई जा रही है।
बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल बने हॉटस्पॉट, जलजमाव बना मुख्य कारण
जिले में सबसे अधिक मरीज बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल से सामने आ रहे हैं। इनमें कंकड़बाग, पत्रकार नगर, अशोक नगर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, पोस्टल पार्क, अजीमाबाद, योगीपुर और जक्कनपुर जैसे घनी आबादी वाले मोहल्ले प्रमुख रूप से प्रभावित हैं। अधिकारियों के अनुसार, बारिश के बाद खाली पड़े प्लॉटों में जलजमाव, निर्माण स्थलों पर जमा गंदा पानी, खुली नालियां और घरों के आसपास छोटे जलस्रोतों में मच्छरों के पनपने के कारण इन इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

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