Assam: असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में आज सीएम हेमंत सोरेन ने विशाल जनसभा को संबोधित किया. जेएमएम के इस कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधन के दौरान उन्होंने असम की जनता के संघर्ष व राजनीतिक उतार-चढ़ाव को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि असम की जनता अगर हाथ खींच ले तो देश का चाय व्यापार ठप्प पड़ जाएगा. उन्होंने बताया कि वे आदिवासी लोग ही हैं, जिनकी बदौलत देश का चाय उद्योग चल रहा है.
झारखंड बनाने के संकल्प की यात्रा
झारखंड सीएम ने असम के अखिल आदिवासी छात्र संघ (AASAA) नेता प्रदीप नाग का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हितों की ही लड़ाई लड़ते-लड़ते उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए. बता दें कि वे AASAA के अध्यक्ष थे. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन का संघर्ष सैकड़ों वर्षों पुराना है. उन्होंने कहा कि जब यह संघर्ष अपने चरम पर था और उसका कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा था, तब क्रांतिकारी नेताओं ने अलग राज्य बनाने का संकल्प लिया था. जिसका बिगुल धनबाद से फूंका गया था. जिसका परिणाम वर्ष 2000 में 15 नवंबर को स्थापित हुए झारखंड राज्य के रूप में निकलकर आया. इस संघर्ष से जुड़े क्रांतिकारियों में सीएम ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन का भी जिक्र किया.
आदिवासियों ने दी प्राणों की आहुति
उन्होंने झारखंड निर्माण संबंधी संबोधन में आगे कहा कि वह राज्य निर्माण का संघर्ष आसान नहीं था. झारखंड मुक्ति मोर्चा के कई सदस्यों ने, आदिवासी महिला-पुरुषों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी, कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा. लेकिन इतनी कड़ी लड़ाई से वे पीछे नहीं हटे, जिस कारण झारखंड का निर्माण संभव हो सका.
आदिवासी समाज को लड़नी होगी हक की लड़ाई
उन्होंने अपने संबोधन का रुख आगे चलकर एकता की ओर कर दिया. आदिवासी एकता की बात करते हुए उन्होंने वर्तमान में व्याप्त भेदभावों की बात की. कहा कि आज भी आदिवासी समाज बौद्धिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है. उन्होंने आदिवासी समाज को एक छत्र के नीचे आने को ही इस समस्या का निवारण बताया. झारखंड सीएम ने कहा कि जिनसे आज आदिवासियों की लड़ाई है वे हर प्रकार से सक्षम हैं. इसलिए एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़नी पड़ेगी.
"आज चुनाव आयोग भी है 'उनकी' जेब में"
भाजपा पर वाक् प्रहार करते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि चुनाव आयोग आदि विभिन्न संस्थाएं उनकी जेब में चली गई हैं. लेकिन आपको अपने एक वोट की कीमत को पहचानना होगा, क्योंकि एक वोट से किसी को कुर्सी मिल सकती है, तो एक वोट के कारण ही कोई इससे वंचित भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि महंगाई कम करने के नाम पर यह सरकार सत्ता में आई थी. लेकिन आज आलम यह है कि गैस, तेल आदि हर चीज महंगी होती जा रही है.
मिलकर लड़ेंगे तो हासिल होगी मंजिल
सीएम हेमंत सोरेन ने याद दिलाते हुए कहा कि जब झारखंड निर्माण का संघर्ष चल रहा था तब नारा दिया गया था- "कैसे लेंगे झारखंड.. लड़कर लेंगे झारखंड". लेकिन आज लड़ाई बुद्धि से लड़ने की आवश्यकता है. उन्होंने हौसला आफजाई करते हुए कहा कि हम ऐसे वीरों की संतानें हैं, जिन्होंने कभी किसी के सामने घुटने नहीं टेके. उन्होंने कहा कि हमें ऐसी मानसिकता रखनी होगी कि "हमें छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं". उन्होंने आदिवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि इंकलाब जिंदाबाद के नारे के साथ अगर सभी मिलकर आगे बढ़ेंगे, तो मंजिल जरूर मिलेगी.
असम JMM के लिए क्यों है महत्वपूर्ण
असम में रहने वाले झारखंड के लोगों की एक बहुत बड़ी आबादी है. असम की कुल जनसंख्या का अनुमानित 18 से 20 प्रतिशत जनता मूल रूप से झारखंड की है, जो जिनके वोट प्राप्ति की चाह से सीएम हेमंत सोरेन असम के चुनाव को महत्वपूर्ण मान रहे हैं. बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा वर्तमान में सिर्फ अपने राज्य तक ही सीमित है. जिनका राष्ट्रीय पार्टी बनने का रास्ता असम से होकर खुल सकता है. जेएमएम ने पहली बार यहां 2011 में 25 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे. इस बार पार्टी दस से पंद्रह सीटों पर कैंडिडेट उतार सकती है. असम में 70 लाख प्रवासी झारखंडी रहते हैं जो यहां की कुल आबादी का 20% हैं.
प्रवासी झारखंडियों की बड़ी आबादी
कार्बी अंगलौंग, दीमा हसाओ के स्वायत्त जिले के अलावा अपर असम से बराक घाटी तक में मौजूद है. असम में 126 में 19 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं. इन आरक्षित सीटों पर संभावना की तलाश करने पिछले साल जेएमएम की चार सदस्यीय समिति ने असम का दौरा किया था. इस समिति में चमरा लिंडा, विजय हांसदा भी शामिल थे. जेएमएम को यकीन है कि हालिया चुनाव में बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देश के सबसे बड़े आदिवासी नेता के तौर पर उभरे हैं और इसका फायदा पार्टी को चुनाव में हो सकता है.







