रांची के पारस अस्पताल में 9 माह की बच्ची की मौत पर भारी बवाल, कटे होंठ के ऑपरेशन के दौरान गई जान
रांची के पारस अस्पताल में कटे होंठ की सर्जरी के दौरान 9 माह की बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की।

Ranchi: राजधानी रांची के पारस अस्पताल में कटे होंठ (Cleft Lip) के इलाज और ऑपरेशन के दौरान 9 महीने की नवजात बच्ची की मौत का अत्यंत संवेदनशील व गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के बीच भारी तनाव और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मौत के 5 घंटे बीत जाने के बाद भी बच्ची का शव लेने से साफ इनकार कर दिया और अस्पताल में ही डटे रहे।
लोहरदगा से कटे होंठ का ऑपरेशन कराने पहुंचे थे परिजन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोहरदगा निवासी आशीष महली और अणिमा कुमारी अपनी 9 महीने की मासूम बच्ची अपनीर के जन्मजात कटे होंठ की सर्जरी कराने के उद्देश्य से रांची आए थे। परिजनों ने 18 अगस्त को बच्ची को पारस अस्पताल में विधिवत भर्ती कराया था, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका सफल ऑपरेशन किया जा सके।
19 अगस्त की रात बिगड़ी तबीयत, सुबह 5 बजे ICU में किया शिफ्ट
परिजनों के मुताबिक, भर्ती रहने के दौरान 19 अगस्त की रात अचानक नवजात की तबीयत बिगड़ने लगी। उस दौरान उसे कुछ दवाइयां दी गईं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 20 अगस्त की सुबह करीब 5:00 बजे बच्ची को आनन-फानन में आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया गया।
'बिना सूचना दिए ICU ले गए, सीधे दी मौत की खबर'
पीड़ित माता-पिता का गंभीर आरोप है कि बच्ची को आईसीयू में ले जाने से पहले डॉक्टरों ने उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी और न ही स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। इसके बाद ऑपरेशन और उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो जाने के बाद सीधे उन्हें इसकी सूचना दी गई। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और समय पर सही चिकित्सकीय निर्णय न लेने के कारण उनकी मासूम बच्ची की जान चली गई।
शव लेने से इनकार, गलती स्वीकार करने की मांग पर अड़े परिजन
मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और अस्पताल परिसर में भारी आक्रोश फैल गया। परिजनों और अस्पताल के कर्मचारियों के बीच काफी देर तक तीखी बहस और कहासुनी होती रही। घटना के 5 घंटे बाद भी परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया। उनका कहना है कि जब तक अस्पताल प्रबंधन अपनी गलती स्वीकार नहीं करता और लापरवाह डॉक्टरों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे बच्ची का शव नहीं लेंगे और अस्पताल परिसर में ही न्याय की मांग को लेकर डटे रहेंगे।
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