CTET बनाम JTET का नॉर्मलाइजेशन कितना सही? झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC से मांगा जवाब, 7 सितंबर को अगली सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया में CTET और JTET अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइजेशन तथा पारा-गैर पारा शिक्षकों के मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए JSSC को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

Jharkhand High Court: झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा नॉर्मलाइजेशन विवाद अब गहराता जा रहा है। मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां अदालत ने नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया और उसके तरीके पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। पारा शिक्षकों की ओर से दायर 103 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में 6 से 7 प्रमुख बिंदुओं पर 'इश्यू फ्रेम' किए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 7 सितंबर को होगी।
हाईकोर्ट ने पूछे दो सबसे बड़े सवाल?
1. क्या पारा शिक्षकों का नॉर्मलाइजेशन, गैर-पारा (नॉन-पैरा) अभ्यर्थियों के साथ किया जा सकता है?
2. क्या CTET (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों का नॉर्मलाइजेशन, JTET (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास अभ्यर्थियों के साथ करना कानूनन सही (विधिसम्मत) है?
JSSC को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश
इन सवालों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सुनवाई के दौरान जो 6-7 प्रमुख बिंदु (इश्यू) तय किए गए हैं, आयोग उन सभी पर अपना विस्तृत जवाब (एफिडेविट) अदालत में दाखिल करे।
अदालत में इन्होंने रखा पक्ष
इस अहम सुनवाई में याचिकाकर्ताओं (पारा शिक्षकों) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार के साथ अधिवक्ता चंचल जैन, अमृतांश वत्स और शुभम मिश्रा सहित अन्य वकीलों ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। वहीं, JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने आयोग का बचाव करते हुए अदालत के समक्ष अपनी दलीलें पेश कीं।
अब सभी की निगाहें 7 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई और JSSC के जवाब पर टिकी हैं, जिससे राज्य के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों का भविष्य तय होगा।
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