Noah's Ark: तुर्की में वैज्ञानिकों ने हाल ही में बाइबिल में वर्णित नूह की पोत (जहाज) की खोज कर ली है. जिसने विशेषज्ञों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है. इसकी खोज करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने नूह की पोत (नूआ आर्क) के जिवाश्म की खोज कर ली है. बता दें, वैज्ञानिकों को तुर्की के तुरुपिनार फॉर्मेशन पर ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) सर्वेक्षण से एक भूमिगत संरचना मिली है जिसने पूरी दुनिया को अपनी तरफ आकर्षित कर लिया है.
मिल गया नोआ आर्क ठहरने का जगह ?
दरअसल, तुर्की के जिस जगह पर नाव के आकार का यह टीला पाया गया है उसकी संरचना बाइबल में बताए गए नूह की पोत यानी नोआ आर्क से मिलती जुलती है. यह माउंट अरारट से करीब 29 किलोमीटर दक्षिणी में स्थित है. जहां सदियों से नोआ आर्क के ठहरने का जगह माना जाता है. बता दें, बाइबिल भी अरारट पर्वत श्रेणी पर नूह की पोत के ठहरने का जगह बताया गया है. 
शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए नाव के टीले का आकार 515 फीट लंबाई, 86 फीट चौड़ाई और 52 फीट ऊंचाई (515×86×52 फीट) है जो बाइबिल में बताए नूह के जहाज के आकार "तीन सौ हाथ लंबा, पचास हाथ चौड़ा और तीस हाथ ऊंचा'' (300×50×30 क्यूबिट) से मैच करता हैं. मिट्टी के सैंपल में सड़े हुए लकड़ी के निशान (पोटैशियम और ऑर्गेनिक मैटेरियल) अधिक मिले है. टीले के ऊपर असामान्य रंग के घास है जो नीचे पर कुछ अलग होने का संकेत देता है. वैज्ञानिकों द्वारा इसके प्राकृतिक या मानव निर्मित होने की जांच की जा रही है.
क्या-क्या अवशेष मिले ?
शोधकर्ताओं द्वारा ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) से पता चला है कि नीचे तेज कोण वाली दीवारें, एक केंद्रीय गलियारा (कॉरिडोर) 13 फीट चौड़ा और कई लेयर की आंतरिक संरचना है और यह बाइबल में बताए गए तीन मंजिला नूह की पोत से मैच करता है. भू-वैज्ञानिकों द्वारा इसे दशकों से प्राकृतिक मिट्टी का ढेर या चट्टान माना जाता था जो भूकंप या ज्वालामुखियों की गतिविधियों से बना हो, लेकिन जो नए डेटा सामने आए है उसमें जियोमेट्री, आंतरिक खाली जगहें और कोण वाली संरचनाएं नजर आ रही है जो प्राकृतिक नहीं दिखती.
क्या स्थिति है अब ?
जांच में अब तक किसी भी तरह के लकड़ी के टुकड़े या पुरातात्विक वस्तुएं नहीं मिली है, शोधकर्ताओं द्वारा पूरे जहाज की बजाय उसके अवशेष यानी सड़ी लकड़ियां और केमिकल इंप्रिंट की तलाश की जा रही है. बता दें, इसपर इस्तांबुल तकनीकी विश्वविद्यालय, एग्री इब्राहिम सेसेन विश्वविद्यालय और संयुक्त राज्य अमेरिका में एंड्रयूज विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का एक सहयोग माउंट अरारट और नूह के सन्दूक अनुसंधान दल के बैनर तले 2021 से कार्य कर रहा है. आगे टीम (Noah’s Ark Scans) और तुर्की-अमेरिकी वैज्ञानिक इसपर ड्रिलिंग, अधिक सैंपल और टेस्टिंग करेंगे. इसे लेकर 2025-2026 में और सर्वे किया जा सकता हैं.
वैज्ञानिकों के बीच छिड़ी बहस
नूआ आर्क की ये खबर वर्ष 2025 में Popular Mechanics, CBN News, Jerusalem Post जैसी जगहों पर आई थी. जिसे लोग काफी रोमांचक मान रहे हैं. विशेषज्ञों की शोध के मुताबिक, ये सामग्री 3500 से 5000 वर्ष पुरानी हैं. और यह समय सीमा 5500 से 3000 ईसा पूर्व तक फैले ताम्र पाषाण काल से भी मेल खाती है. जो उत्पत्ति में वर्णित बाइबिल के महा-जलप्रलय के युग से जुड़ा है. हालांकि इसे लेकर वैज्ञानिक समुदायों के बीच बहस छिड़ी हुई है. कि क्या यह वाकई में नूह की पोत है या संयोगवश प्राकृतिक की बनी कोई संरचना. मगर यह बाइबिल की महाप्रलय की नूह की कहानी को नई उम्मीद दे रही है. लेकिन अंतिम सबूत के लिए और इसकी जांच तो जरूरी है ही.








