राज्यपाल गंगवार ने की कश्मीरी युवाओं से मुलाकात, 'वतन को जानो' कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे J&K के प्रतिभागी
रांची में कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत "वतन को जानो " का आयोजन किया जा रहा है. इसमें भाग लेने आए जम्मू-कश्मीर के युवाओं से खास भेंट की झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने.

Jharkhand (Ranchi): राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज लोक भवन, रांची में आयोजित कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम 2025-26 के अंतर्गत “वतन को जानो” कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामुला, बडगाम, श्रीनगर एवं पुलवामा जिलों से आए प्रतिभागियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, परंतु हमारी आत्मा एक है. भाषा, वेशभूषा और परंपराओं की भिन्नता के बावजूद राष्ट्रीय एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है. ऐसे कार्यक्रम आपसी संवाद, विश्वास और समझ को प्रगाढ़ करते हैं तथा भावनात्मक एकता को सुदृढ़ बनाते हैं.

सांस्कृतिक विरासत को समेटे है 'पृथ्वी का स्वर्ग'
उन्होंने भूतपूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि कश्मीर भारत का किरीट है और उसकी सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक भव्यता एवं आध्यात्मिक चेतना राष्ट्र की पहचान है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण ‘पृथ्वी का स्वर्ग’ कहलाता है.

'वसुधैव कुटुम्बकम' हमारी संस्कृति का मूल
राज्यपाल ने कहा कि भारत ने सदैव शांति, संयम और संवाद का मार्ग अपनाया है. “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना हमारी संस्कृति का मूल है. उन्होंने कहा कि यह भी सत्य है कि समय-समय पर हमारे पड़ोसी राष्ट्र ने नापाक इरादो से इस क्षेत्र में अशांति फैलाने का भी प्रयास किया है. लेकिन जब भी राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती दी गई एवं हमला हुआ, हमने उसका मुंहतोड़ जवाब भी दिया है. उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास और समान अवसरों का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है. अनुच्छेद 370 हटने के पश्चात वहां विकास की नई संभावनाएं सृजित हुई हैं.

राज्यपाल का युवाओं से आह्वान
राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, कौशल, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का आधार बनाएं तथा ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं. उन्होंने झारखंड की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, सरहुल, करमा और सोहराय जैसे प्रकृति-आधारित पर्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड अपनी सांस्कृतिक विविधता और युवा ऊर्जा के कारण विशेष पहचान रखती है. उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रवास युवाओं की दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा तथा वे यहां से सौहार्द, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का सकारात्मक संदेश लेकर लौटेंगे.
"लोकभवन आकर्षण का केंद्र"
उन्होंने लोक भवन, रांची उद्यान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यहां 100 से अधिक प्रजातियों के गुलाब सहित अनेक दुर्लभ वृक्ष एवं पौधे हैं, जो आकर्षण का केंद्र हैं. उन्होंने कहा कि लोक भवन उद्यान को आम नागरिकों के भ्रमण हेतु खोला गया है तथा अब तक पाँच लाख से अधिक लोग उद्यान का भ्रमण कर चुके हैं. उन्होंने युवाओं से लोक भवन उद्यान का भी अवलोकन करने को कहा.
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