शिव भक्ति की वजह से मिला तीन तलाक!, झारखंड की जमीला बनी 'ज्योति', प्रकाश के साथ लिए सात फेरे
बोकारो की 18 वर्षीय जमीला खातून ने बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में सनातन धर्म अपनाकर ज्योति देवी नाम रखा। इसके बाद उन्होंने प्रकाश रविदास से वैदिक रीति-रिवाज से विवाह किया।

Bokaro: भगवान शिव की पूजा करने की वजह से एक मुस्लिम महिला को उसके ही शौहर ने पीटकर तीन तलाक दे दिया। लेकिन इसके बाद इस महिला ने अपनी जिंदगी का जो फैसला लिया, उसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में झारखंड की रहने वाली 18 साल की जमीला खातून ने सनातन धर्म अपना लिया है। अब वह जमीला से ज्योति देवी बन गई हैं और उन्होंने हजारीबाग के रहने वाले 22 वर्षीय प्रकाश रविदास के साथ हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे ले लिए हैं।
शिव भक्ति और पाबंदियों से घुटन की कहानी
झारखंड के बोकारो जिले के लोधी नीचा टोला की रहने वाली जमीला का कहना है कि उनकी शुरुआत से ही भगवान भोलेनाथ में गहरी आस्था थी। वह घर पर भी उनकी पूजा-अर्चना किया करती थीं, लेकिन उनके ससुराल वालों को यह बात बिल्कुल भी रास नहीं आती थी। जब जमीला ने शिव की पूजा छोड़ने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके पहले शौहर ने उनके साथ न सिर्फ जमकर मारपीट की, बल्कि तीन तलाक देकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। ज्योति (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि उन्हें बुर्के और कट्टर धार्मिक पाबंदियों में काफी घुटन महसूस होती थी, जबकि महादेव की भक्ति उन्हें एक अलग तरह की मानसिक शांति देती थी।
बेसहारा वक्त में मिला प्रकाश का साथ, प्यार और फिर शादी का फैसला
शौहर के इस जुल्म और तीन तलाक के बाद जमीला खुद को बिल्कुल बेसहारा और अकेली महसूस कर रही थीं। इसी मुश्किल वक्त में उनकी मुलाकात हजारीबाग के चानो ऊंचाघाना इलाके के रहने वाले प्रकाश रविदास से हुई। पहले दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और फिर धीरे-धीरे यह रिश्ता एक गहरे प्यार में बदल गया। इसके बाद दोनों ने एक साथ अपनी नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया। अपने इलाके में किसी भी तरह के भारी विरोध या बवाल की आशंका से बचने के लिए दोनों ने झारखंड छोड़ने का मन बनाया और सीधे बरेली पहुंच गए।
आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई 'घर वापसी'
बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचने के बाद जमीला ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाने की इच्छा जताई। आश्रम के महंत के.के. शंखधार ने सनातन परंपरा के अनुसार आचमन, शुद्धिकरण और गायत्री मंत्र के जाप से उन्हें दीक्षा दिलाई। हिंदू धर्म अपनाने के ठीक बाद उनका नया नाम ज्योति देवी रखा गया। फिर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रकाश और ज्योति हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए। नई नवेली दुल्हन ज्योति का कहना है कि हिंदू धर्म में महिलाओं को देवी के समान सम्मान मिलता है और उन्होंने बिना किसी डर या दबाव के, अपनी मर्जी से यह 'घर वापसी' की है।
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