दिवंगत मंत्री सुदिव्य सोनू के चले जाने से मातम में डूबा गिरिडीह
गिरिडीह के हरदिल अजीज जननेता और पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन के गहरे सदमे से शहर अब तक उबर नहीं पाया है।
Giridih: गिरिडीह के हरदिल अजीज जननेता और पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन के गहरे सदमे से शहर अब तक उबर नहीं पाया है। सोमवार की सुबह हर किसी का दिल उस वक्त दहल गया जब दिवंगत मंत्री के 12 वर्षीय बेटे हर्ष कुमार ने बेहद गमगीन माहौल में अपने पिता की अस्थियों का विधिवत विसर्जन किया। पिता की अस्थियों को नदी की जलधारा में प्रवाहित करते मासूम बेटे को देखकर वहां मौजूद हर शख्स फफक पड़ा। शहर की गलियों से लेकर बाजारों तक सोमवार को एक गहरा सन्नाटा और मातम पसरा नजर आया।
आंगनबाड़ी और जलसहिया संघ ने नम आंखों से दी विदाई
दिवंगत नेता की याद में गिरिडीह में दिनभर अलग-अलग कर्मचारी यूनियनों और सामाजिक संगठनों द्वारा शोकसभाओं का दौर चलता रहा। इसी कड़ी में महिला मजदूर मोर्चा के बैनर तले एक संयुक्त शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ और जलसहिया संघ की महिला कर्मी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। सभी ने स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
'महिलाओं की हर मुश्किल में ढाल बनते थे सोनू दा'
शोकसभा को संबोधित करते हुए महिला मजदूर मोर्चा की अंशुलता स्वरूप, सितारा प्रवीण और सरिता देवी ने भावुक होकर कहा कि स्वर्गीय सोनू का पूरा कार्यकाल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने उनसे एक ऐसा होनहार, संवेदनशील और मजबूत नेतृत्वकर्ता बहुत असमय छीन लिया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। इस दौरान नीतू देवी, इशरत खातून, बबली दास, अनिता कुमारी, नंदा सिंह और पूनम पासवान समेत दर्जनों महिला कर्मियों की आंखें नम थीं।
BNS DAV स्कूल में भी गूंजा मातम, शिक्षकों ने याद किए पुराने पल
इधर गिरिडीह के प्रतिष्ठित BNS DAV पब्लिक स्कूल में भी एक विशेष शोकसभा आयोजित की गई। स्कूल के प्रिंसिपल सचिन गर्ग की अगुवाई में शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा। शिक्षकों ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा कि मंत्री जी का इस स्कूल के साथ एक बेहद गहरा और पारिवारिक लगाव था। वे यहां के बच्चों को हमेशा अपने बेटे-बेटियों की तरह स्नेह देते थे।
'बाल वाटिका' की शुरुआत कर बच्चों के दिल में बसाई थी जगह
शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन ने याद दिलाया कि विद्यालय परिसर में नन्हें बच्चों के लिए बनाई गई 'बाल वाटिका' की औपचारिक शुरुआत खुद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के कर-कमलों द्वारा ही की गई थी। वे अक्सर स्कूल के कार्यक्रमों में आकर बच्चों का हौसला बढ़ाते थे। उनके इस तरह अचानक चले जाने से स्कूल परिवार ने एक सच्चा अभिभावक और मार्गदर्शक खो दिया है। पूरे शहर में आयोजित इन शोकसभाओं ने साबित कर दिया कि सोनू दा सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि गिरिडीह के हर तबके के सुख-दुख के सच्चे साथी थे।
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