चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर झारखंड के पूर्व काग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने लगाए गंभीर आरोप
ट्रिब्यूनल का सहारा लेना पड़े, तो भी लंबी दूरी तय करनी होती है. ठाकुर ने इसे वोटरों को मतदान से रोकने की साजिश बताया. उन्होंने कहा कि आप किसी का नाम यूं ही नहीं काट सकते. यदि गलत तरीके से नाम हटाए जाते हैं,

DUMKA (Jharkhand): झारखंड के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के चुनाव प्रभारी राजेश ठाकुर चुनाव प्रचार के सिलसिले में बंगाल जाते समय दुमका परिसदन में ठहरे. जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.
राजेश ठाकुर ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह की कवायद आयोग द्वारा की जा रही है, वह निंदनीय है. उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से नाम काटने की प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी गई है कि लोगों को अपने नाम जुड़वाने या सुधार करवाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दार्जिलिंग में किसी मतदाता का नाम काट दिया जाता है, तो उसे 500-600 किलोमीटर दूर जाकर अपनी सफाई देनी पड़ती है. यदि ट्रिब्यूनल का सहारा लेना पड़े, तो भी लंबी दूरी तय करनी होती है. ठाकुर ने इसे वोटरों को मतदान से रोकने की साजिश बताया. उन्होंने कहा कि आप किसी का नाम यूं ही नहीं काट सकते. यदि गलत तरीके से नाम हटाए जाते हैं, तो पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को अन्य संवैधानिक संस्थाओं को इस तरह के विवादों में नहीं घसीटना चाहिए.
राजेश ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिम वोटों के बिखराव की बात करना एक सुनियोजित एजेंडा है. उन्होंने कहा कि अन्य समुदायों के वोटों के बिखराव पर चर्चा नहीं होती, जिससे साफ है कि यह मुद्दा जानबूझकर उठाया जाता है. उन्होंने कहा कि बंगाल और केरल जैसे राज्यों में इस तरह की राजनीति सफल नहीं होगी, क्योंकि वहां की जनता जागरूक है और नफरत की राजनीति को समझती है.
बंगाल चुनाव पर बयान
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार कौन बनाएगा, यह जनता तय करेगी. उन्होंने ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि दोनों धुर्वीकरण की राजनीति के कारण विकास प्रभावित हुआ है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इस बार मजबूत विकल्प बनकर उभरेगी और जनता मोहब्बत की राजनीति को चुनेगी, जैसा कि राहुल गांधी कहते हैं.
असम चुनाव और आयोग की भूमिका पर सवाल
असम के संदर्भ में उन्होंने हिमांता बिस्वा शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बौखलाए हुए हैं और उनकी भाषा से यह स्पष्ट है कि वे सत्ता खोने के डर में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से की गई शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है. उल्टा शिकायत करने वालों के घर पुलिस भेजी जा रही है, जिससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े होते हैं.
पवन खेड़ा पर सफाई
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को लेकर उठे सवालों पर ठाकुर ने कहा कि खेड़ा फरार नहीं हैं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं और अदालत से अग्रिम जमानत ले चुके हैं. उन्होंने कहा कि साजिशों के खिलाफ लड़ाई में कानूनी रास्ता अपनाना जरूरी है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खरगे के हेट स्पीच पर
राजेश ठाकुर ने बीजेपी पर आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं के कथित हेट स्पीच पर ध्यान नहीं दिया जाता. उन्होंने कहा कि कुछ बयानों को गलत तरीके से पेश कर विवाद खड़ा किया जाता है, जबकि उनका उद्देश्य लोगों को सतर्क करना होता है. राजेश ठाकुर का बयान चुनावी माहौल में बढ़ती राजनीतिक तल्खी को दर्शाता है. चुनाव आयोग की भूमिका, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और ध्रुवीकरण की राजनीति जैसे मुद्दे आने वाले चुनाव में प्रमुख रहने वाले हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोप-प्रत्यारोप का असर मतदाताओं के फैसले पर कितना पड़ता है.
रिपोर्ट- विजय तिवारी
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.









