जयराम और ढुल्लू महतो पर FIR: गर्भवती महिला की मौत के बाद कर रहे थे न्याय की मांग
सांसद ढुल्लू महतो और डुमरी विधायक जयराम महतो समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. बीते दिनों एक गर्भवती महिला की अपराधियों द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जिस मामले में न्याय और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही थी.

Bokaro, Jharkhand: गर्भवती महिला की मौत से उपजा जनाक्रोश अब राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है. जिस सड़क जाम को स्थानीय लोग न्याय की मांग का प्रतीक बता रहे थे, उसी आंदोलन में शामिल होने के आरोप में धनबाद सांसद ढुल्लू महतो और डुमरी विधायक जयराम महतो समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से इलाके का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है.
सांसद-विधायक का मिला पीड़ित परिवार को साथ
ढोरी पांच नंबर क्षेत्र में गर्भवती महिला की मौत के बाद लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा था. महिला की कोयला तस्करों द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. परिजन और ग्रामीण सड़क जाम कर आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग कर रहे थे. इसी दौरान सांसद ढुल्लू महतो, विधायक जयराम महतो और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे थे. मंच से न्याय की आवाज उठी, प्रशासन पर सवाल उठे और पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया गया कि उनकी लड़ाई अकेली नहीं है.
राजनीतिक गलियारों पर चर्चा
लेकिन अब कहानी में नया मोड़ आ गया है. बेरमो अनुमंडल पदाधिकारी के आवेदन पर दर्ज एफआईआर में इन नेताओं के नाम शामिल होने के बाद मामला केवल सड़क जाम तक सीमित नहीं रह गया है. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जनप्रतिनिधियों को जनता की आवाज बनने की कीमत चुकानी पड़ रही है, या फिर कानून अपने रास्ते पर चल रहा है.
छह अपराधियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
दिलचस्प बात यह है कि गर्भवती महिला की हत्या के मामले में पुलिस पहले ही छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन और बंद का कार्यक्रम भी वापस ले लिया गया था. इसके बावजूद सड़क जाम प्रकरण में हुई कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को नया रंग दे दिया है.
FIR से उठ रहे सवाल
अब बेरमो में चर्चा केवल हत्या कांड की नहीं, बल्कि उस एफआईआर की भी है जिसमें एक सांसद और एक विधायक आरोपी बनाए गए हैं. आने वाले दिनों में यह मामला अदालत, प्रशासन और राजनीति तीनों के केंद्र में रहने वाला है. लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनप्रतिनिधि इस कार्रवाई का जवाब कैसे देते हैं और प्रशासन अपने कदमों को किस तरह सही ठहराता है.
(बोकारो से संजीव कुमार सिंह की रिपोर्ट)
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