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Ranchi Desk : बुलंदशहर जिले के नरौरा क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी को झकझोर दिया. यहां एक मां ने अपने ही 3.5 साल की बच्ची की हत्या कर दी और इतना ही नहीं, उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या का आरोप दूसरों पर लगाने के लिए झूठी कहानी भी गढ़ी. बीते 1 अक्टूबर को नरौरा गंग नहर में एक बच्ची का शव मिला. पुलिस जांच में पता चला कि शव 3.5 वर्षीय दिव्यांशी का है. उसी दिन बच्ची की मां सीमा उर्फ लाली, थाना नरौरा पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई कि ललतेश नाम की महिला समेत कुछ लोगों ने उसकी बच्ची का अपहरण कर लिया है. पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन तफ्तीश में कई बातें संदिग्ध लगीं. पूछताछ और सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि अपहरण की कहानी झूठी थी. दरअसल, हत्या की साजिश खुद सीमा और उसके प्रेमी यतेन्द्र उर्फ पिच्चू ने रची थी.
मां और उसके प्रेमी ने रचा थी खौफनाक साजिश
जांच में खुलासा हुआ कि सीमा और यतेन्द्र के बीच प्रेम संबंध थे. सीमा के पति राकेश की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी. उसके तीन बेटे और एक बेटी थी. तीनों बेटे उम्र में बड़े थे, जबकि दिव्यांशी सबसे छोटी थी. सीमा मजदूरी करती थी. उसने बताया कि छोटी बच्ची की देखभाल उसके लिए मुश्किल हो गई थी. जब भी वह काम पर जाती, बच्ची को संभालना बोझ लगता था. इसके अलावा, उसका और यतेन्द्र का कस्बा अहमदगढ़ के कुछ लोगों से विवाद भी चल रहा था. सीमा को डर था कि वे लोग उसे झूठे मुकदमे में फंसा देंगे. इसी कारण दोनों ने एक खतरनाक योजना बनाई — बच्ची की हत्या कर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया जाए ताकि दूसरों पर शक जाए.
30 सितंबर की रात का खौफ
30 सितंबर 2025 की रात दोनों ने मासूम दिव्यांशी की हत्या कर दी. पुलिस के मुताबिक, दोनों ने बच्ची का मुंह दबाकर उसकी जान ले ली. फिर शव को नरौरा गंग नहर में फेंक दिया ताकि कोई सबूत न बचे. अगले दिन 1 अक्टूबर को सीमा ने थाने पहुंचकर झूठी कहानी बनाई कि कुछ लोगों ने उसकी बेटी का अपहरण कर लिया है. लेकिन पुलिस ने जब गहराई से जांच की तो मामला पूरी तरह पलट गया.
जांच और खुलासा
जांच के दौरान पुलिस को कई विरोधाभास मिले. तकनीकी सर्विलांस और गवाहों के बयान से साफ हो गया कि जिस समय सीमा अपहरण की बात कह रही थी, उसी वक्त वह और यतेन्द्र आसपास ही थे. कठोर पूछताछ में दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया. उन्होंने बताया कि उन्होंने ही दिव्यांशी की हत्या की और फिर दूसरों को फंसाने के लिए झूठी एफआईआर दर्ज कराई. 4 अक्टूबर को पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस का बयान
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण तेजवीर सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में जिन लोगों पर सीमा ने आरोप लगाया था, वे निर्दोष पाए गए. जांच में यह साबित हुआ कि हत्या की साजिश खुद मां और उसके प्रेमी ने रची थी. दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जहां उन्होंने अपराध कबूल किया. हत्या के बाद शव को गंग नहर में फेंक दिया गया और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई ताकि उनपर शक न जाए. पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या (IPC धारा 302), सबूत मिटाने (धारा 201) और आपराधिक साजिश (धारा 120B) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया.
मां ने क्यों किया ऐसा कुकृत्य?
पूछताछ में सीमा ने कहा कि वह अपनी छोटी बेटी से परेशान थी. तीन बड़े बेटों की तुलना में दिव्यांशी बहुत छोटी थी और उसे हमेशा देखभाल की जरूरत थी. सीमा का कहना था कि जब वह काम पर जाती थी तो बच्ची उसके काम में रुकावट बनती थी. उसने कहा कि कई बार गुस्से में उसे लगा कि अगर बच्ची नहीं रहेगी तो उसकी जिंदगी आसान हो जाएगी. यतेन्द्र ने भी माना कि सीमा के कहने पर उसने उसकी मदद की. हत्या के बाद दोनों ने सोचा कि मामला दूसरों पर डालकर वे बच निकलेंगे.
सामाजिक और कानूनी विश्लेषण
यह घटना समाज और न्याय व्यवस्था के लिए कई गंभीर सवाल खड़े करती है.
मां और बच्ची का रिश्ता
- यह अपराध मातृत्व की पवित्र छवि पर गहरी चोट है. एक मां अपनी ही बेटी की हत्यारिन बन गई — यह दर्शाता है कि मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव व्यक्ति को कितना अमानवीय बना सकता है.
झूठे मुकदमे का खेल
- हत्या के बाद दूसरों को फंसाने की साजिश ने कानून व्यवस्था के साथ छल करने की प्रवृत्ति को उजागर किया है. अगर पुलिस ने गहराई से जांच न की होती, तो निर्दोष लोग फंस सकते थे.
मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक दबाव:
- गरीबी, अकेलापन, मानसिक तनाव और सामाजिक असुरक्षा — ये कारक किसी भी व्यक्ति को गलत दिशा में धकेल सकते हैं. यह मामला इस बात की चेतावनी है कि हमें ऐसे परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य और सहायता पर ध्यान देना चाहिए.
न्याय व्यवस्था की भूमिका:
- पुलिस की सक्रियता और विवेकपूर्ण जांच ने सच्चाई को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई. समय पर कार्रवाई से यह साबित होता है कि संवेदनशील मामलों में कानून की पकड़ मजबूत हो सकती है.
बुलंदशहर की यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता की परीक्षा है. 3.5 साल की मासूम दिव्यांशी, जो अपनी मां की गोद में सबसे सुरक्षित होनी चाहिए थी, वही उसकी कब्र बन गई. पुलिस ने अपराधियों को पकड़ लिया, लेकिन यह सवाल अभी भी बाकी है — क्या समाज, गरीबी और मानसिक तनाव मिलकर इंसान को इस हद तक ले जा सकते हैं कि वह अपनी ही संतान की जान ले ले?
यह घटना हर उस परिवार और समाज के लिए चेतावनी है जो टूटते रिश्तों, मानसिक दबाव और सामाजिक असमानता से गुजर रहा है.









