झारखंड हाईकोर्ट से BCA डिग्रीधारियों को बड़ी राहत, UGC की 2014 की अधिसूचना को आधार मानकर सुनाया अहम फैसला
झारखंड हाईकोर्ट ने BCA डिग्री को विज्ञान स्ट्रीम में माना है। UGC की 2014 अधिसूचना के आधार पर JSSC TGT नियुक्ति में BCA धारकों को बड़ी राहत मिली।

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) की डिग्री विज्ञान (Science) स्ट्रीम के अंतर्गत ही आती है। अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की साल 2014 की अधिसूचना में बीसीए को विज्ञान संकाय में रखा गया है। यह प्रावधान कोई नई व्यवस्था लागू करने वाला नहीं है, बल्कि डिग्रियों के स्ट्रीम को स्पष्ट करने वाला एक नियम है, जिसे पूर्व की डिग्रियों पर भी पूरी तरह लागू माना जाएगा। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की दो अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है, जो बीसीए डिग्रीधारियों की नियुक्ति से जुड़ा था। मामले में प्रतिवादी मुकेश रंजन की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने मजबूती से अपना पक्ष रखा।
JSSC ने TGT नियुक्ति से कर दिया था वंचित
यह पूरा विवाद शारीरिक शिक्षा विषय में ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT) के पद पर नियुक्ति से संबंधित था। जारी किए गए भर्ती विज्ञापन में अभ्यर्थी के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 45 प्रतिशत अंकों के साथ आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स में स्नातक के साथ शारीरिक शिक्षा की डिग्री होना अनिवार्य किया गया था। अभ्यर्थी अभिजीत कुमार सिन्हा ने साल 2005 में इग्नू (IGNOU) से और मुकेश रंजन ने सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय से बीसीए की डिग्री हासिल की थी। दोनों के पास शारीरिक शिक्षा की डिग्री भी मौजूद थी। इसके बावजूद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने दोनों की उम्मीदवारी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि बीसीए की डिग्री आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स में स्नातक नहीं है। इसी फैसले के खिलाफ दोनों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
सरकार के तर्कों को अदालत ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और जेएसएससी की तरफ से यह तर्क दिया गया कि दोनों अभ्यर्थियों ने 2014 से पहले डिग्री हासिल की थी, और 2009 की यूजीसी अधिसूचना में बीसीए को किसी विशेष स्ट्रीम में नहीं रखा गया था। सरकार का कहना था कि 2014 की अधिसूचना भविष्य के लिए लागू थी, इसलिए पुरानी डिग्रियों को विज्ञान स्नातक नहीं माना जा सकता। लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 2014 की अधिसूचना में डिग्रियों की जानकारी सिर्फ स्पष्टता (Clarity) के लिए दी गई थी और बीसीए का कोई नया नामकरण नहीं हुआ था। अदालत ने यह भी गौर किया कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने इंटरमीडिएट (10+2) की पढ़ाई भी विज्ञान स्ट्रीम से ही की थी।
पूर्व की डिग्रियों पर भी लागू होगा स्पष्टीकरण
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जब कोई भी अभ्यर्थी विज्ञापन में निर्धारित अन्य सभी योग्यताएं पूरी करता है और उसके अंक अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक हैं, तो केवल बीसीए डिग्री होने के आधार पर उसकी उम्मीदवारी को मनमाने ढंग से खारिज नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सुधारात्मक या स्पष्टीकरणात्मक (Clarificatory) प्रावधानों का प्रभाव पूर्व की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए भी होता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उन आदेशों को बिल्कुल सही ठहराया, जिनमें दोनों अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था। अदालत के इस न्यायपूर्ण फैसले के बाद मुकेश रंजन ने 1 अक्टूबर 2024 को और अभिजीत कुमार सिन्हा ने 4 अप्रैल 2025 को अपनी सेवा ज्वाइन कर ली है।
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