कार बाज़ार में बड़ा भूचाल! जिसे समझा सबसे 'सस्ता और टिकाऊ', अब उसी Petrol Car को क्यों खरीदने से डर रहे लोग?
E20 पेट्रोल को लेकर ग्राहकों की चिंता के बीच जुलाई में पेट्रोल कारों की बाजार हिस्सेदारी घटकर 41.68% हुई। CNG, EV और डीजल कारों की मांग बढ़ने से ऑटो बाजार में बदलाव के संकेत हैं।

Auto Market India : जिस पेट्रोल कार को भारतीय परिवार बरसों से आंख मूंदकर खरीदते आ रहे थे, अचानक उससे मोहभंग होने लगा है। पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल (E20) मिलाने पर छिड़ी बहस अब ख़बरों से निकलकर कार शोरूम्स तक पहुंच चुकी है। जुलाई के आंकड़े चीख-चीखकर कह रहे हैं कि ग्राहकों का भरोसा अब बदल रहा है। कोई CNG का माइलेज नाप रहा है, कोई EV का बजट जोड़ रहा है, तो कोई चुपके से उस डीजल कार को पूछने लगा है जिसे बाज़ार लगभग अलविदा कह चुका था।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) की ताज़ा रिपोर्ट चौंकाने वाली है। जुलाई में पेट्रोल कारों की बाज़ार हिस्सेदारी गिरकर 41.68 प्रतिशत पर आ गई है। दूसरी तरफ CNG और इलेक्ट्रिक जैसी कारों ने इतनी तेज़ छलांग लगाई है कि इनकी हिस्सेदारी 40.59 प्रतिशत पहुंच गई है। जो फर्क कभी 13 फीसदी का हुआ करता था, वो अब घटकर महज़ 1 फीसदी रह गया है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि अगर यही रफ्तार रही तो अगले एक-दो महीनों में CNG और EV मिलकर पेट्रोल कारों को पछाड़ देंगे।
माइलेज गिरने का डर और संसद में उठी बात
आखिर पेट्रोल कारों से अचानक यह दूरी क्यों? इसकी सबसे बड़ी वजह E20 पेट्रोल से जुड़ा डर है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं कि E20 से गाड़ियों का माइलेज गिर रहा है और इंजन को नुकसान पहुंच रहा है। बात इतनी बढ़ गई कि सरकार को संसद में स्वीकार करना पड़ा कि E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों का माइलेज 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है और फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। इसी डर से लोग नई पेट्रोल कार खरीदने का फैसला टाल रहे हैं।

शोरूम में खड़ी-खड़ी धूल फांक रही हैं गाड़ियां
ग्राहकों के इस अचानक बदले मूड का सबसे बुरा असर कार डीलरों पर पड़ा है। जुलाई में कार कंपनियों ने डीलरों को 4.69 लाख गाड़ियाँ भेजीं, लेकिन शोरूम से बिकीं सिर्फ 4.16 लाख। यानी एक ही महीने में 52 हजार से ज्यादा गाड़ियाँ शोरूमों में डंप हो गईं। आमतौर पर गाड़ियां 21 से 30 दिनों में बिक जानी चाहिए, लेकिन अब 25 प्रतिशत से ज्यादा डीलरशिप पर गाड़ियाँ 60 से 70 दिनों से खड़ी-खड़ी धूल फांक रही हैं।
डीजल कारों की सरप्राइज एंट्री!
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस डीजल इंजन को कार कंपनियां बंद कर चुकी थीं, उसकी पूछ फिर से बढ़ गई है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने 2020 में ही डीजल गाड़ियाँ बनाना बंद कर दिया था, लेकिन जुलाई में डीजल कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 17.73 फीसदी पर पहुँच गई। वजह साफ है, डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का कोई झंझट नहीं है और ग्राहक इसे फिलहाल सबसे भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं।
क्या त्योहारी सीजन में बदल जाएगी कंपनियों की चाल?
रक्षाबंधन से देश में त्योहारों का सीजन शुरू हो रहा है और कार कंपनियों को बंपर बिक्री की उम्मीद है। लेकिन अगर ग्राहकों का मन पेट्रोल से यूं ही उचटा रहा, तो कंपनियों को अपनी उत्पादन रणनीति बदलनी पड़ेगी। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में कंपनियाँ पेट्रोल कारों का ये भारी-भरकम स्टॉक खाली करने के लिए ग्राहकों को क्या बड़े डिस्काउंट ऑफर करती हैं।
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