कई यातनाएं भी झेलनी पड़ी है। लेकिन इस लड़ाई में हर हाल में जीत हासिल करेंगे।उनका परिवार विस्थापन,भू अर्जन और पुनर्वास को लेकर लगातार आंदोलन करते रहा हैं। लेकिन हमारे परिवार पर लगातार मुकदमा किया जाता रहा है। पिता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को जेल में रखा गया था। माता को रामगढ़ जेल में और भाई को हजारीबाग जेल में रखा गया था।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार का विस्थापन,भू अर्जन और पुनर्वास के मामले में हमेशा उदासीनता रवैया देखने को मिलता है। एनटीपीसी, अडानी और सीसीएल जैसी कॉरपोरेट कंपनी कॉर्पोरेट माफिया बन चुकी है और पुलिस प्रशासन के सहयोग से रैयतों को तरह-तरह से परेशान कर रहे हैं। मुआवजा और पुनर्वास से वंचित करते आ रहे हैं। सारे रैयतों में से एक रैयत हमारा परिवार भी हैं। भारत का राजपत्र निकला हुआ है कि 2015 के पहले मुआवजा नहीं मिला है। तो 2015 के बाद 2013 अधिनियम लागू होगा। कॉल बैरिंग एक्ट लागू नहीं होगा। लेकिन इसे अनदेखा किया गया है।
हमारे परिवार के संघर्ष का ही नतीजा है कि बड़कागांव के रैयतों को 3 से 25 लाख मुआवजा मिला हैं। माइनिंग के लिए ली गई जमीन को भी रैयतों को लौटाया गया है। 2013 अधिनियम के तहत मुआवजा निर्धारित किया जाए। इसके लिए रैयत हाई कोर्ट भी गए है। 83 रैयत हाई कोर्ट गये है।लेकिन न्यायालय का आर्डर आया कि संबंधित पदाधिकारी के पास जाये। कौन संबंधित पदाधिकारी है। यह कोर्ट ने नहीं बताया है। इस आर्डर को लेकर जब डीसी के पास जाते हैं। तो वहां भी कार्रवाई नहीं की जाती है। अंधा गूंगा सरकार में रैयत कंहा जाए।
उनके घर को तोड़ने के मामले पर कहा कि एनटीपीसी ने चार नोटिस दिया। चौथा नोटिस यह बोलते हुए दिया गया कि बिल्डिंग डिवीजन से मुआवजा निर्धारित किया गया है।जबकि बिल्डिंग डिविजन को यह पावर नहीं है। अवैध तरीके से एनटीपीसी ने मुआवजा निर्धारण कराया। वही घर तोड़ने से पहले सामान भी निकालने नहीं दिया गया। लगभग 20 से 30 लाख रुपए का सामान को डैमेज किया गया। पुलिस की 100 गाड़ियां भेजी गई थी। कॉर्पोरेट के द्वारा इस तरह का कार्रवाई की गई है। ऐसा लगता है कि एनटीपीसी के पॉकेट में पुलिस प्रशासन और सरकार है।
अम्बा ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री को यह पता नहीं था। उन्होंने एक बार भी सूद नहीं ली, की क्या समस्या है। कोर्ट में मामला चलने के बावजूद दबाव में घर गिरने के कार्रवाई की गई है।इसकी घोर निंदा करते है।
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित करने के मामले पर उनकी बेटी और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कांग्रेस पार्टी से जवाब मांगा है। अंबा प्रसाद ने कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि पार्टी को सारी जानकारी थी। बावजूद इसके पार्टी प्रवक्ता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता यह कह रहे हैं कि उन्हें पार्टी फॉर्म में बोलना चाहिए था। बिना नोटिस के उनके पिता को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस पूरे मामले को लेकर वह शीर्ष नेतृत्व तक जाएंगी। साथ ही कहा कि लगातार उनके परिवार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई हो रही है लेकिन मुख्यमंत्री ने सूद तक नहीं ली।









