अस्पताल से छुट्टी के बाद फिर बिगड़ी मांझी की तबीयत, डॉक्टरों की सलाह पर दिल्ली रवाना
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की तबीयत फिर बिगड़ गई है। पटना के मेदांता अस्पताल से छुट्टी के बाद उन्हें डॉक्टरों की सलाह पर आगे की जांच के लिए दिल्ली ले जाया गया।


पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ने के बाद उन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया है। हाल ही में स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार के बाद बुधवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। हालांकि, बुधवार देर रात उन्हें दोबारा बुखार आने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें दिल्ली ले जाने का फैसला किया गया।
परिवार के सदस्य यात्रा के दौरान उनके साथ रहे। बताया जा रहा है कि दिल्ली में मांझी के कई मेडिकल टेस्ट कराए जा सकते हैं। फिलहाल दोबारा स्वास्थ्य समस्या सामने आने की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। परिवार के सदस्य और पार्टी के नेता डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट और आगे की चिकित्सकीय जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
हाल के दिनों में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं मांझी
जीतन राम मांझी की तबीयत को लेकर खबर सामने आने के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में भी चिंता जताई जा रही है। मांझी हाल के हफ्तों में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं और खास तौर पर आरक्षण तथा अनुसूचित जाति कोटे में उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर लगातार अपनी राय रखते रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ भी उनके सार्वजनिक तौर पर अलग-अलग विचार सामने आए हैं। चिराग पासवान मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के विरोध में अपना पक्ष रख चुके हैं, जबकि मांझी और उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) अनुसूचित जाति के भीतर उप-वर्गीकरण के पक्ष में रहे हैं।
SC कोटे में उप-वर्गीकरण के पक्ष में मांझी
मांझी ने अपने तर्क में 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है, जिसमें राज्यों को कुछ संवैधानिक शर्तों के अधीन अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई थी। उनका कहना रहा है कि इस फैसले के बाद राज्यों के पास यह आकलन करने का आधार है कि आरक्षण का लाभ अनुसूचित जाति समुदाय के विभिन्न वर्गों तक समान रूप से पहुंच रहा है या नहीं।
मांझी का तर्क है कि कुछ समुदायों को लंबे समय से आरक्षण का अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला है, जबकि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े कुछ समूह अब भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व से दूर हैं। उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए दावा किया है कि वहां उप-वर्गीकरण के जरिए अलग-अलग समुदायों के बीच आरक्षण के लाभों के वितरण को लेकर बदलाव देखने को मिला है।
फिलहाल मांझी के स्वास्थ्य को लेकर अंतिम स्थिति दिल्ली में होने वाली जांच और डॉक्टरों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

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