नामकुम अंचल कार्यालय में ACB की रेड, फोन बंद कर गायब हुईं पूर्व अंचलाधिकारी!
राजधानी रांची के नामकुम अंचल में जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी और डबल म्यूटेशन (दोहरी जमाबंदी) के एक बहुचर्चित मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपनी जांच तेज कर दी है।
Ranchi: राजधानी रांची के नामकुम अंचल में जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी और डबल म्यूटेशन (दोहरी जमाबंदी) के एक बहुचर्चित मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपनी जांच तेज कर दी है। झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर दर्ज प्राथमिकी के बाद ACB की विशेष जांच टीम ने नामकुम अंचल कार्यालय पर छापा मारा। जांच अधिकारियों ने अंचल के रिकॉर्ड रूम (रोकड़ रुम) में घंटों तक फाइलों को खंगाला, जहां से जमीन से जुड़े कई अहम और संवेदनशील दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
पूर्व CO श्वेता वर्मा और दो CI के खिलाफ केस नंबर 18/26 दर्ज
ACB ने इस संगठित फर्जीवाड़े को लेकर कांड संख्या 18/26 दर्ज किया है। मामले में नामकुम की तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) श्वेता वर्मा, तत्कालीन अंचल निरीक्षक (CI) मनोज कुमार और तत्कालीन सीआई दीपक कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी यह कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि आखिर किन नियमों को ताक पर रखकर पहले से दर्ज रैयत की जमीन का दोबारा म्यूटेशन किया गया और इस खेल में किस स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत रही।
सीओ श्वेता वर्मा का फोन स्विच ऑफ, ACB कर रही तलाश
जांच की आंच तेज होते ही तत्कालीन CO श्वेता वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ACB उनसे पूछताछ करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है और वह अपने वर्तमान पते से भी नदारद बताई जा रही हैं। ACB की टीम अब उनकी गिरफ्तारी और पूछताछ के लिए संभावित ठिकानों की टोह ले रही है।
डुंडू मौजा की 1.22 एकड़ जमीन से जुड़ा है पूरा विवाद
यह पूरा मामला धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत डुंडू गांव स्थित खाता संख्या 32 के विभिन्न प्लॉटों (प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822) से संबंधित है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनकी मां ने विभिन्न वैध रजिस्टर्ड डीड के माध्यम से कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी, जिसके वे उत्तराधिकारी हैं। आरोप है कि अंचल अधिकारियों की सांठगांठ से सरकारी पंजियों में हेराफेरी कर करीब 1.22 एकड़ जमीन का अवैध रूप से म्यूटेशन कर 'प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड' के नाम नया डिमांड खोल दिया गया। 17 अगस्त 2016 को जब मूल रैयत को अंचल से डबल जमाबंदी का नोटिस मिला, तब जाकर इस बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ।
कंपनी ने आरोपों को नकारा, जांच में सहयोग की बात कही
दूसरी ओर, प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक चंद्रप्रकाश धेलिया ने हेराफेरी के सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कंपनी ने वर्ष 2009 में वैध दस्तावेजों के साथ जमीन खरीदी थी और वर्ष 2011-12 में विधिवत म्यूटेशन कराकर 2021 तक ऑनलाइन लगान भी चुकाया। उन्होंने दावा किया कि LRDC कोर्ट द्वारा एकतरफा म्यूटेशन रद्द किए जाने के बाद DC कोर्ट ने उनके पक्ष में म्यूटेशन बहाल रखने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और कंपनी ACB की जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार है।
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