JPSC गड़बड़ी मामले में अभय तिवारी की जमानत पर सुनवाई पूरी, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
राजधानी रांची से JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में बड़ी खबर सामने आई है।
Ranchi: राजधानी रांची से JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में बड़ी खबर सामने आई है। जेल में बंद मुख्य आरोपियों में से एक अभय तिवारी की जमानत याचिका पर अदालत में सुनवाई पूरी हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से जोरदार बहस और दलीलें पेश किए जाने के बाद अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के आदेश के बाद ही साफ होगा कि परीक्षा में धांधली के इस अहम आरोपी को जमानत पर रिहाई मिलेगी या फिर उसे अभी जेल में ही दिन काटने पड़ेंगे।
अदालत में CID और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस
अभय तिवारी की जमानत अर्जी पर दोनों पक्षों के बीच कानूनी दांव-पेंच देखने को मिले। इस मामले में पिछली सुनवाई तीन सितंबर को हुई थी, जब जांच एजेंसी CID ने अदालत में अपना कड़ा रुख रखते हुए जमानत का विरोध किया था। इसके बाद आज आरोपी अभय तिवारी के वकील की ओर से जमानत के पक्ष में दलीलें रखी गईं। अदालत ने दोनों पक्षों की बात को विस्तार से सुनने के बाद अपना अंतिम फैसला रिजर्व कर लिया।
नौकरी का झांसा देकर लाखों की वसूली का संगीन आरोप
CID की जांच में अभय तिवारी की भूमिका बेहद अहम और संदिग्ध मानी जा रही है। वह TDPL (TDPL) कंपनी में बतौर मार्केटिंग मैनेजर काम कर चुके हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अभय तिवारी ने न सिर्फ अपने सगे-संबंधियों, बल्कि दर्जनों अभ्यर्थियों को नौकरी का लालच देकर उनसे मोटी रकम वसूली थी। इस बड़े मामले में सीआईडी अब तक बीस से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ने में लगातार लगी हुई है।
पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते की भूमिका पर भी खड़े हुए सवाल
CID ने JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता को लेकर कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया था। इसी जांच की आंच आयोग के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते तक भी पहुंची थी। जांच एजेंसी ने पहले उन्हें गिरफ्तार किया और फिर रिमांड पर लेकर लंबी पूछताछ की थी, जिसके बाद से वे भी सलाखों के पीछे हैं। यह मामला कानूनी रूप से इसलिए भी बेहद गंभीर हो गया है क्योंकि अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान में पूर्व चेयरमैन की भूमिका का भी जिक्र सामने आया है।
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