'पिता के पास से मां की गोद में लौटा 3 साल का मासूम', जमशेदपुर कस्टडी विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने...
झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के 3.6 वर्षीय बच्चे की अंतरिम कस्टडी 24 अगस्त तक मां को सौंपने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पिता से विस्तृत जवाब मांगा और अगली सुनवाई तय की।

Jharkhand high court : झारखंड उच्च न्यायालय ने करीब 3.6 वर्ष के एक मासूम बच्चे की कस्टडी से जुड़े संवेदनशील मामले में बुधवार को अहम फैसला सुनाया है। अदालत के पूर्व में दिए गए कड़े आदेश के अनुपालन में जमशेदपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) ने बच्चे को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मानवीय और बाल कल्याण के दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हुए बच्चे की अंतरिम कस्टडी आगामी 24 अगस्त तक के लिए उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने बच्चे के पिता को मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 24 अगस्त मुकर्रर की है।
मां ने दाखिल की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
यह पूरा विवाद बच्चे की मां द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉरपस) याचिका से जुड़ा हुआ है। अपनी याचिका में मां ने गुहार लगाई थी कि उनके 3.6 वर्षीय बेटे को पिता के अवैध कब्जे से मुक्त कराकर अदालत के समक्ष पेश कराया जाए और उसकी कस्टडी उन्हें वापस दिलाई जाए। याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
विदेश ले जाने की आशंका पर पासपोर्ट जब्त करने का हुआ था आदेश
सुनवाई के दौरान पीड़ित मां ने अदालत के समक्ष यह गंभीर आशंका जताई थी कि बच्चे के पिता उसे बिना उनकी सहमति के जबरन देश से बाहर विदेश ले जा सकते हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में ही बच्चे को भारत से बाहर ले जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। साथ ही जमशेदपुर SSP को निर्देशित किया गया था कि वे बच्चे का पासपोर्ट तत्काल अपने कब्जे में लें और अगली तारीख पर बच्चे को सशरीर अदालत में पेश करें। कोर्ट के इन सख्त निर्देशों के बाद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित अदालत में पेश किया, जहां से उसे फिलहाल मां के सुपुर्द कर दिया गया है।
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