जेल में रहेंगे या मिलेगी बेल?, पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांग्ते और मास्टरमाइंड अभय तिवारी की जमानत पर फैसला सुरक्षित!
रांची की विशेष सीआईडी (CID) अदालत में जेपीएससी (JPSC) परीक्षा में हुई धांधली के मामले में बुधवार को एक बहुत अहम सुनवाई हुई।


Ranchi: रांची की विशेष सीआईडी (CID) अदालत में जेपीएससी (JPSC) परीक्षा में हुई धांधली के मामले में बुधवार को एक बहुत अहम सुनवाई हुई। जेल में बंद राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते के साथ-साथ इस पूरे खेल के मुख्य कर्ताधर्ता अभय तिवारी, सौरभ सुमन और अरविंद कुमार की जमानत याचिका पर अदालत में बहस हुई। दोनों पक्षों की ओर से जोरदार दलीलें सुनने के बाद विशेष कोर्ट ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है।
CID ने कोर्ट में पेश किए थे 1000 पन्नों के सबूत
इस मामले की पिछली तारीख पर CID ने लगभग 1000 पन्नों की एक मोटी केस डायरी अदालत के सामने रखी थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस डायरी में आरोपियों के खिलाफ ऐसे कई पक्के सबूत और दस्तावेज मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि परीक्षा में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा हुआ था। बुधवार को सुनवाई के दौरान सीआईडी के वकीलों ने इन चारों आरोपियों को जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया और अदालत से कहा कि मामला बेहद गंभीर है, इसलिए इन्हें कतई राहत न दी जाए।
परीक्षा एजेंसियों से कमीशन और नियुक्तियों का बड़ा खेल
गौरतलब है कि एल ख्यांग्ते लगभग एक साल तक जेपीएससी के अध्यक्ष पद पर रहे थे, जबकि तत्कालीन एग्जाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता का कार्यकाल भी आयोग में काफी लंबा रहा था। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि मास्टरमाइंड अभय तिवारी और उसके परिवार के कई लोगों को JPSC की अलग-अलग परीक्षाओं के जरिए सरकारी नौकरियां दिलवाई गई थीं। वहीं पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा कराने वाली कंपनियों और एजेंसियों से कमीशन के नाम पर मोटी रकम अपनी जेब में डाली।
24 से ज्यादा लोग सलाखों के पीछे, अब फैसले का इंतजार
CID ने परीक्षा में हुई इस भारी अनियमितता को लेकर कांड संख्या 16/2026 के तहत केस दर्ज किया था और तेजी से कार्रवाई करते हुए अब तक 24 से ज्यादा लोगों को जेल भेज चुकी है। पिछले दिनों पकड़े जाने के बाद से ये सभी मुख्य आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल की हवा खा रहे हैं। अब देखना होगा कि अदालत CID की दलीलों और केस डायरी के आधार पर इन बड़े नामों को राहत देती है या उनकी जेल की मियाद और लंबी होती है।

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