Sarhasa (Bihar): सहरसा जिले के सत्तर कटैया प्रखंड से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय बीजलपुर तक पहुंचने के लिए आज तक कोई समुचित रास्ता नहीं बनाया गया है. विद्यालय चारों ओर से प्राकृतिक बाधाओं से घिरा हुआ है, जिससे छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
जानकारी के अनुसार, स्कूल के एक तरफ घना जंगल है तो दूसरी ओर नहर है, जबकि विद्यालय खेत के बीचों-बीच स्थित है. ऐसे हालात में खासकर बालिकाओं को स्कूल पहुंचने में जोखिम उठाना पड़ता है, जिससे अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर अंचलाधिकारी को आवेदन भी दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को इस समस्या से अवगत क्यों नहीं कराया गया.
बिजलपुर के पूर्व मुखिया संजीव कुमार सहित कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द विद्यालय तक सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था की जाए. ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय के लिए जमीन राम जानकी ट्रस्ट द्वारा दान में दी गई थी, लेकिन रास्ते की व्यवस्था किए बिना ही स्कूल का निर्माण कर दिया गया.
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. लोगों का कहना है कि जब स्कूल तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं था, तो आखिर निर्माण की अनुमति कैसे दी गई. उन्होंने प्रशासन से शीघ्र रास्ते का समाधान निकालने की मांग की है, ताकि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें.
रिपोर्ट. इन्द्र देव









