राजुला के भेरई में अनोखा शेर मंदिर, वर्ल्ड लायन डे पर हुई खास पूजा
विश्व शेर दिवस पर गुजरात के राजुला स्थित भेराई शेर मंदिर में विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम हुए। ट्रेन हादसे में मारे गए दो शेरों की याद में बना यह मंदिर संरक्षण और सम्मान का प्रतीक है।

राजुला: 10 अगस्त को वर्ल्ड लायन डे है। शेरों के बचाव, बचाव और शेर-इंसान के साथ रहने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए पूरी दुनिया में कई तरह के प्रोग्राम किए जाते हैं। अमरेली ज़िले की शेरों की धरती के तौर पर एक खास पहचान है, वहीं राजुला तालुका के भेरई गांव में मौजूद शेर मंदिर वर्ल्ड लायन डे के जश्न को एक अनोखा और इमोशनल रूप देता है। शेरों के लिए प्यार और सम्मान का प्रतीक यह मंदिर शेर प्रेमियों के लिए खास आस्था का केंद्र बन गया है।
ट्रेन एक्सीडेंट में दो शेरों की मौत के बाद बना है शेर मंदिर
भेरई के इस शेर मंदिर के पीछे शेरों के लिए प्यार और दुख की एक दुखद घटना जुड़ी हुई है। यहां ट्रेन एक्सीडेंट में दो शेरों की मौत के बाद शेर प्रेमियों में बहुत इमोशन पैदा हो गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि शेर प्रेमियों ने शेरों की याद को बनाए रखने और शेरों के प्रति अपने प्यार और सम्मान को दिखाने के लिए यहां शेर मंदिर बनवाया था।
आज यह मंदिर सिर्फ़ एक धार्मिक जगह ही नहीं, बल्कि शेरों के बचाव और शेरों से प्यार का प्रतीक भी बन गया है। शेर प्रेमियों के लिए यह जगह इमोशनली भी बहुत ज़रूरी मानी जाती है।
हर साल 10 अगस्त को वर्ल्ड लायन डे के मौके पर भेराई लायन मंदिर में खास प्रोग्राम होते हैं। शेर प्रेमियों के साथ-साथ फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी और कर्मचारी भी इकट्ठा होकर शेर की पूजा करते हैं। इस मौके पर सिंह चालीसा और कहानियों के पाठ समेत धार्मिक प्रोग्राम होते हैं।
शेर प्रेमियों के लिए यह दिन सिर्फ़ जश्न का दिन नहीं है, बल्कि शेरों की सुरक्षा और बचाव का वादा लेने का भी दिन है। नेचर लवर, शेर प्रेमी और अलग-अलग फील्ड के लोग यहां इकट्ठा होते हैं और शेरों की सुरक्षा को लेकर अपनी भावनाएं ज़ाहिर करते हैं।
वर्ल्ड लायन डे के दिन भेराई लायन मंदिर खास आकर्षण का केंद्र बन जाता है। सौराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से शेर प्रेमी यहां पहुंचते हैं। जो लोग शेर को सिर्फ़ एक जंगली जानवर नहीं बल्कि सौराष्ट्र की पहचान और शान के निशान के तौर पर देखते हैं, वे इस दिन यहां खास तौर पर मौजूद रहते हैं।
वर्ल्ड लायन डे के मौके पर कई जगहों पर रैलियां, पब्लिक अवेयरनेस प्रोग्राम, शेरों के बचाव पर सेमिनार और कई तरह के प्रोग्राम किए जाते हैं। लेकिन, राजुला तालुका के भेराई में शेर प्रेमियों का यह सेलिब्रेशन अपनी अनोखी परंपरा और इमोशनल जुड़ाव की वजह से खास बना हुआ है।
अमरेली जिला देश और दुनिया में एशियाई शेरों के रहने की जगह के लिए जाना जाता है। गिर और आस-पास के इलाकों में शेरों की मौजूदगी की वजह से पूरे सौराष्ट्र को शेरों की धरती के नाम से जाना जाता है। ऐसे इलाके में शेर के नाम पर मंदिर बनना शेर प्रेमियों की भावनाओं और शेरों के प्रति सम्मान का एक अनोखा उदाहरण है।
भेराई का यह मंदिर शेरों के बचाव से जुड़े लोगों के लिए प्यार, आस्था और सुरक्षा के संदेश का प्रतीक बन रहा है। वर्ल्ड लायन डे पर यहां होने वाली पूजा और दूसरे प्रोग्राम के ज़रिए लोगों तक शेरों को बचाने और उनके नेचुरल हैबिटैट को बचाकर रखने का संदेश पहुंचाया जाता है।
इस दिन अलग-अलग फील्ड के लीडर, पॉलिटिकल लीडर, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी, नेचर लवर और शेर प्रेमी भी भेराई में शामिल होते हैं और शेरों के प्रति अपनी भावनाएं जाहिर करते हैं। इस प्रकार, 10 अगस्त को विश्व शेर दिवस का उत्सव केवल राजुला पंथक के भेराई में कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि शेर के प्रति आस्था, प्रेम और सुरक्षा के संकल्प के साथ एक अनोखे तरीके से मनाया जाता है।
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