TMC के बागी नेताओं ने चुनी NCPI, अचानक बदल गए सियासी समीकरण
TMC से अलग हुए सांसदों ने NCPI का थामा हाथ, संसद में अलग पहचान की मांग तेज.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद अब तक लगभग अनजान रही NCPI अचानक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गई है।
बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग समूह के रूप में पहचान देने और अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। माना जा रहा है कि सांसदों ने यह कदम दल-बदल कानून के तहत कानूनी सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया है। क्योंकि किसी पार्टी के दो-तिहाई या उससे ज्यादा सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं तो उन पर अयोग्यता का खतरा नहीं रहता।
दिलचस्प बात यह है कि जिस NCPI का नाम अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है, उसकी राजनीतिक मौजूदगी अब तक बेहद सीमित रही है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी जनवरी 2023 में पंजीकृत हुई थी। इसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में है, लेकिन इसने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में लड़ा था। उस चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके और उसे बहुत कम वोट मिले थे।
अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। करीब 20 सांसदों के समर्थन के साथ NCPI की ताकत अचानक बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक छोटी और निष्क्रिय पार्टी में शामिल होकर बागी सांसद अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखने के साथ संगठन पर ज्यादा प्रभाव भी रख सकते हैं। यही वजह है कि कुछ ही दिनों में NCPI का नाम देश की राजनीति में तेजी से चर्चा में आ गया है।
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