बिहार में अब शिक्षक लेंगे AI की क्लास! गूगल देगा ट्रेनिंग, बदलने वाला है सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका
बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब AI की ट्रेनिंग ले सकते हैं। शिक्षा विभाग Google for Education India के साथ एमओयू की तैयारी कर रहा है. पहले जिला स्तर पर शिक्षकों का चयन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा।


पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका आने वाले दिनों में बदल सकता है। शिक्षा विभाग अब शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग देने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए Google for Education India के साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि शिक्षकों को AI की ट्रेनिंग देने के लिए शिक्षा विभाग और गूगल के बीच जल्द ही एमओयू (MoU) साइन किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को AI के व्यावहारिक इस्तेमाल से परिचित कराना है, ताकि वे तकनीक का इस्तेमाल पढ़ाई को ज्यादा आसान और प्रभावी बनाने में कर सकें। साथ ही विद्यार्थियों को भी AI के दौर के लिए तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने गूगल टीम के साथ की बैठक
जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग और Google for Education India की टीम के बीच इस संबंध में बैठक हो चुकी है. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की ओर से शिक्षकों की ट्रेनिंग को लेकर पत्र भी लिखा जा रहा है। MOU साइन होने के बाद गूगल की ओर से अपने रिसोर्स पर्सन बिहार भेजे जाने की योजना है। ये विशेषज्ञ शिक्षकों को AI के अलग-अलग पहलुओं और शिक्षा में इसके इस्तेमाल की जानकारी देंगे।
AI ट्रेनिंग के लिए शुरुआत में शिक्षा विभाग जिला स्तर पर शिक्षकों का चयन करेगा। चयनित शिक्षकों को पहले मास्टर ट्रेनर के तौर पर तैयार किया जाएगा। इसके बाद इन प्रशिक्षित शिक्षकों के जरिए अन्य शिक्षकों तक भी AI से जुड़ी ट्रेनिंग पहुंचाने की योजना है।
इस मॉडल से बड़ी संख्या में शिक्षकों को प्रशिक्षण देने में मदद मिल सकती है और AI आधारित शिक्षण को स्कूलों तक पहुंचाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
शिक्षकों को सिखाया जाएगा AI का इस्तेमाल
ट्रेनिंग में शिक्षकों को सिर्फ AI के बारे में जानकारी देने के बजाय उसके व्यावहारिक इस्तेमाल पर फोकस किया जाएगा. इसमें किसी विषय के लिए बेहतर प्रॉम्प्ट तैयार करना, AI की मदद से पढ़ाई की सामग्री तैयार करना और विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार कंटेंट को आसान बनाने जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। सिलेबस और विषयों को विद्यार्थियों के स्तर के मुताबिक समझाने के लिए AI का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इस पर भी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना है।
शिक्षकों के AI में प्रशिक्षित होने का सीधा फायदा विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है। मुश्किल विषयों को आसान तरीके से समझाने, अलग-अलग स्तर के छात्रों के लिए अध्ययन सामग्री तैयार करने और विद्यार्थियों को उनकी सीखने की गति के अनुसार मदद देने में AI उपयोगी हो सकता है। खास तौर पर डिजिटल दौर में विद्यार्थियों को तकनीक के सही और जिम्मेदार इस्तेमाल की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के तरीके में आ सकता है बदलाव
बिहार शिक्षा विभाग की यह पहल सफल रहती है तो आने वाले समय में सरकारी स्कूलों में पारंपरिक शिक्षण के साथ AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। हालांकि, AI को शिक्षक का विकल्प बनाने के बजाय शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने वाले एक टूल के रूप में इस्तेमाल करना इस पहल की सफलता के लिए अहम होगा। फिलहाल शिक्षा विभाग और Google for Education India के बीच प्रस्तावित एमओयू के बाद ट्रेनिंग का विस्तृत कार्यक्रम और शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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