झारखंड में मानसून के अजब रंग, पश्चिम सिंहभूम में 54% ज्यादा बरसे बादल, पाकुड़ और चतरा में बादलों की बेरुखी से किसान मायूस
झारखंड में इस साल मानसून का मिजाज काफी अलग और हैरान करने वाला नजर आ रहा है।


Ranchi: झारखंड में इस साल मानसून का मिजाज काफी अलग और हैरान करने वाला नजर आ रहा है। 1 जून से 2 सितंबर की अवधि के दौरान राज्यभर में बारिश का कुल औसत सामान्य स्तर पर दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 818.4 मिलीमीटर वास्तविक वर्षा हुई है, जबकि सामान्य वर्षापात 815.6 मिलीमीटर होना चाहिए था। आंकड़ों के लिहाज से विचलन शून्य प्रतिशत रहा है, यानी राज्य स्तर पर सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। हालांकि, अलग-अलग जिलों के स्तर पर बारिश का भारी असंतुलन देखने को मिल रहा है।
पश्चिम सिंहभूम में 54% अधिक बारिश, रांची और कोल्हान में जमकर बरसे बादल
इस मानसून सीजन में सबसे ज्यादा मेहरबानी कोल्हान और मध्यवर्ती जिलों पर रही है। पश्चिम सिंहभूम जिले में सामान्य (822.6 मिमी) के मुकाबले 1263.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 54 फीसदी अधिक है। इसके अलावा लातेहार में 23 प्रतिशत, सरायकेला-खरसावां में 22 प्रतिशत, राजधानी रांची में 18 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 14 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा, धनबाद और जामताड़ा जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य या उससे थोड़ा बेहतर रहा है।
पाकुड़ में 50% की भारी कमी, संताल और उत्तरी छोटानागपुर में चिंता
जहां दक्षिणी और मध्य हिस्से पानी से लबालब हैं, वहीं कई जिलों में बादलों की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पाकुड़ जिला कम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है, जहां सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं देवघर में 33 प्रतिशत और चतरा में 30 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त गिरिडीह, गोड्डा, गढ़वा, कोडरमा, हजारीबाग और साहिबगंज जिलों में भी सामान्य से 20 से 24 प्रतिशत तक कम बादल बरसे हैं।
बोकारो, पलामू और दुमका सामान्य दायरे में
राज्य के कई ऐसे जिले भी हैं जहां मानसून का स्तर सामान्य दायरे के आसपास बना हुआ है। बोकारो (672.5 मिमी), दुमका (713.9 मिमी), पलामू (618.6 मिमी) और रामगढ़ (785.5 मिमी) में वर्षा की कमी शून्य से 9 प्रतिशत के बीच रही है, जो सामान्य श्रेणी में आती है। कुल मिलाकर, दक्षिणी हिस्सों में हुई जोरदार बारिश ने जहां जलस्रोतों को भर दिया है, वहीं उत्तर-पूर्वी और सीमावर्ती जिलों में कम बारिश के चलते खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका गहरा रही है।

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