झारखंड के 12 जिलों के सरकारी शिक्षकों के लिए 676.81 करोड़ रुपये जारी, जल्द होगा अगस्त महीने के वेतन का भुगतान
झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों के लिए 3 सितंबर की तारीख बड़ी राहत भरी खबर लेकर आई।

Ranchi: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों के लिए 3 सितंबर की तारीख बड़ी राहत भरी खबर लेकर आई। अगस्त महीने का वेतन लटकने के चलते शिक्षक आर्थिक तंगी की आशंका से परेशान थे, लेकिन राज्य सरकार ने तत्परता दिखाते हुए 12 जिलों के लिए कुल 676 करोड़ 81 लाख रुपये से अधिक का भारी-भरकम फंड जारी कर दिया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा स्थापना मद की यह राशि मंजूर किए जाने के बाद अब जिला स्तर पर कागजी औपचारिकताएं पूरी होते ही शिक्षकों के बैंक खातों में बकाया वेतन सीधे क्रेडिट होने की उम्मीद बंध गई है।
शिक्षक संघ के पत्र और फोन के बाद हरकत में आया विभाग
अगस्त महीने के वेतन भुगतान में हो रही देरी को लेकर शिक्षकों में बेचैनी लगातार बढ़ रही थी। इस समस्या को लेकर झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ लगातार विभागीय अफसरों से संपर्क साधे हुए था। संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर मारू ने 3 सितंबर को प्राथमिक शिक्षा निदेशालय को औपचारिक पत्र सौंपकर तुरंत राशि जारी करने की मांग उठाई थी। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय आला अधिकारियों से फोन पर भी सीधी बात कर शिक्षकों की परेशानी से अवगत कराया। इस मजबूत पैरवी का असर यह हुआ कि बातचीत के चंद घंटों के भीतर ही शिक्षा विभाग ने राशि आवंटन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया।
जमशेदपुर और पश्चिमी सिंहभूम को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
जारी किए गए बजट में जिलों की जरूरत के हिसाब से फंड का बंटवारा किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा आवंटन जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) को मिला है, जहां के लिए 92.07 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। इसके ठीक बाद पश्चिमी सिंहभूम को 89.15 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। वहीं अन्य प्रमुख जिलों में गिरिडीह के खाते में 74.32 करोड़, गोड्डा को 74.19 करोड़, गुमला को 57.71 करोड़ और सरायकेला-खरसावां जिले को 54.01 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
अब जिलों में तेजी से निपटाई जाए कागजी प्रक्रिया
फंड जारी होने के बाद झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ ने कहा कि विभाग की ओर से बजट रिलीज होना पहला जरूरी कदम था। अब असल जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और संबंधित ट्रेजरी कार्यालयों की है। संघ ने मांग की है कि जिला स्तर पर बिल पास कराने और कागजी प्रक्रिया को बिना किसी लेटलतीफी के 24 से 48 घंटे के भीतर निपटाया जाए ताकि शिक्षकों के हाथ में उनकी मेहनत की कमाई जल्द पहुंच सके। खासकर गढ़वा और लातेहार जैसे जिलों में आवंटन के अभाव में भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी थी, जहां अब तेजी आने की उम्मीद है।

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