गिरिडीह में पिता को मुखाग्नि देने के लिए पेरोल पर जेल से गांव पहुंचा दुष्कर्म का सजायाफ्ता कैदी, रो पड़ीं बहनें
गिरिडीह में दुष्कर्म के सजायाफ्ता कैदी सोमाय मुर्मू को पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने विशेष पेरोल मिली। पुलिस की कड़ी सुरक्षा में उसने मुखाग्नि दी, बहनों की आंखें नम हो गईं।

Giridih News: गिरिडीह जिले के तिसरी थाना क्षेत्र स्थित सलागाडीह गांव में कानून और मानवीय संवेदनाओं का एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। दुष्कर्म के जुर्म में साल 2019 से गिरिडीह केंद्रीय कारागार में सजा काट रहे कैदी सोमाय मुर्मू उर्फ अमरदीप को अदालत के आदेश पर विशेष पेरोल दी गई। पेरोल मिलने के बाद पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच अमरदीप देर शाम अपने पैतृक गांव सलागाडीह पहुंचा और अपने स्वर्गीय पिता के अंतिम संस्कार के सारे धार्मिक विधि-विधान पूरे किए। इस दौरान गांव के श्मशान घाट पर ग्रामीणों और सगे-संबंधियों की भारी भीड़ मौजूद रही।
मरने से पहले पिता ने जताई थी बेटे के हाथों मुखाग्नि की इच्छा
दरअसल, अमरदीप के पिता सावना मुर्मू पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और हाल ही में उनका निधन हो गया। दम तोड़ने से पहले बुजुर्ग पिता ने अपनी अंतिम इच्छा जताई थी कि उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि उनका बेटा सोमाय ही दे। लेकिन बेटा पिछले कई सालों से जेल की चारदीवारी में बंद था, जिससे परिवार के सामने धर्म संकट खड़ा हो गया। पिता की अंतिम इच्छा को पूरा कराने के लिए सलागाडीह गांव के मुखिया किशोरी साहू ने मानवता की मिसाल पेश की और ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त आवेदन को लेकर तुरंत जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया।
मुखिया की पहल पर प्रशासन और अदालत ने दिखाई नरमी
मुखिया के इस मानवीय आवेदन को जिला प्रशासन और संबंधित अदालत ने बेहद संवेदनशीलता के साथ लिया। कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करते हुए न्यायालय ने आरोपी को पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अल्पकालिक पेरोल की मंजूरी दे दी। इसके बाद पुलिस बल की निगरानी में हथकड़ी पहनाकर अमरदीप को सीधे उसके गांव ले जाया गया, ताकि वह अपने पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हो सके।
हथकड़ी में भाई को देखकर रो पड़ीं पांचों बहनें
जैसे ही पुलिस की गाड़ी से हथकड़ी लगा अमरदीप घर के आंगन में उतरा, माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। अपने भाई को इस हाल में देखकर उसकी बहनें बड़की सोरेन, सोमारी मुर्मू, हीरामणि मुर्मू और काजल मुर्मू फफक-फफक कर रो पड़ीं। परिजनों और बहनों का विलाप देखकर मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से मानवीय आधार पर कुछ देर के लिए हथकड़ी खोलने की विनती की। ग्रामीणों के अनुरोध पर पुलिस ने रस्मों के दौरान अमरदीप के हाथों से हथकड़ी हटा दी। इसके बाद उसने बेटे का फर्ज निभाते हुए पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी और सभी जरूरी रीति-रिवाज पूरे किए।
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