न फार्म हाउस बना, न बकरियां आईं!, दुमका में 1 करोड़ 37 लाख रुपये डकार गया नटवरलाल
दुमका में बकरी पालन और पोंजी स्कीम के नाम पर करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

Dumka: दुमका में बकरी पालन और पोंजी स्कीम के नाम पर करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। महिला कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंजुला मुर्मू ने दुमका विश्वविद्यालय थाना में आवेदन देकर करीब 1 करोड़ 37 लाख 38 हजार 400 रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। ठगी के इस जाल में पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अमिता रक्षित, डॉ. मैरी मार्गरेट टुडू, निरुलता बेसरा और प्रियंका स्वीटी हांसदा समेत करीब तीन दर्जन से अधिक महिलाएं और स्थानीय नागरिक फंसे हैं, जिनकी गाढ़ी कमाई अब डूबती नजर आ रही है।
रोजाना मुनाफा और पैसा दोगुना करने का दिया झांसा
शिकायत के मुताबिक, रियल वर्ल्ड एसेट्स (RWA) नामक एक कथित कंपनी ने दिसंबर 2025 में इलाके में दस्तक दी थी। आरोपी विनोद कुमार सिंह, रंजीत शर्मा उर्फ रोशन, मनीष कुमार सिंह और विवेक कुमार ने निवेशकों को हर रोज 0.5 से 0.75 फीसदी मुनाफा देने और कुछ ही समय में मूलधन दोगुना करने का लालच दिया था। योजना में एक हजार से लेकर 15 लाख रुपये तक के निवेश पैकेज तय किए गए थे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए बैठकों और होटलों में दावत का दौर चला, जिसके बाद आदिवासी समाज की दर्जनों महिलाओं ने लाखों रुपये इस फर्जी प्रोजेक्ट में झोंक दिए।
13 अगस्त को अचानक बंद हुआ पोर्टल, मुख्य आरोपी फरार
यह पूरा गोरखधंधा ऑनलाइन एप्लिकेशन और डिजिटल वॉलेट के जरिए संचालित हो रहा था। लेकिन बीते 13 अगस्त 2026 को कंपनी का ऑनलाइन पोर्टल अचानक बंद हो गया। पोर्टल बंद होते ही निवेशकों में हड़कंप मच गया और जब मुख्य सूत्रधार विनोद कुमार सिंह से संपर्क की कोशिश की गई, तो उसका मोबाइल नंबर बंद मिला और वह शहर छोड़कर फरार हो चुका था। इसके बाद निवेशकों के बीच अपने-अपने पैसे को लेकर सिर-फुटव्वल शुरू हो गई।
पत्रकार बनकर ब्लैकमेलिंग और 60 लाख मांगने का आरोप
डॉ. अंजुला मुर्मू ने पुलिस को दिए आवेदन में एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनका आरोप है कि पोर्टल बंद होने के बाद विलियम जैकब नामक शख्स ने खुद को पत्रकार बताते हुए सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाया और प्रोफेसर को ही कंपनी का डायरेक्टर बताकर बदनाम करना शुरू कर दिया। प्रोफेसर का आरोप है कि मामले को दबाने और झूठे केस से बचाने के नाम पर सुष्मिता सोरेन के घर पर उनसे 60 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। प्रोफेसर ने पुलिस से सभी बैंक खातों को तुरंत फ्रीज करने और डिजिटल लेन-देन की फॉरेंसिक जांच कराने की गुहार लगाई है।
शिकायतकर्ता पर भी उठ रहे सवाल, जांच में जुटी पुलिस
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी बनाई गई पारा शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता सुष्मिता सोरेन ने प्रोफेसर के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खुद को पीड़ित करार दिया। सुष्मिता का कहना है कि उन्होंने खुद प्रोफेसर अंजुला के चेहरे और प्रभाव को देखकर तीन लाख रुपये लगाए थे। चर्चा है कि मसलिया में प्रोफेसर की जिस जमीन को फार्म हाउस बताकर प्रोजेक्ट दिखाया गया था, वहां जमीन पर कुछ भी नहीं था। विश्वविद्यालय थाना प्रभारी बाजो रजक और सदर एसडीपीओ दिलीप खलको का कहना है कि मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी गई है और दोनों पक्षों से जुड़े डिजिटल व वित्तीय साक्ष्यों की जांच के बाद ही साफ होगा कि इस अंतर-जिला ठगी नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है।

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