Jharkhand में बढ़ा दूध उत्पादन ,फिर भी मागं के मुकाबले आपूर्ति कम
झारखंड में बढ़ा दूध उत्पादन ,फिर भी मागं के मुकाबले आपूर्ति कम


झारखंड में पिछले कुछ ही सालों के दौरान दूध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दिखी है , और यह क्रम अब तक थमता नजर नहीं आ रहा है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के जो आंकड़े हैं उसके मुताबिक राज्य ने 2020-21 से 2024-25 के बीच दूध उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। 2020-21 में कुल उत्पादन 24.34 लाख टन था, फिर 2024-25 आते आते यह बढ़कर 31.15 लाख टन के आसपास पहुंच गया। फिर भी, उत्पादन में अच्छा सुधार होने के बाद भी झारखंड अब भी देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों की दौड़ में काफी पीछे है। राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का रैंक 11वां माना जा रहा है। इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्य आगे हैं। खास तौर पर, अकेले उत्तर प्रदेश का दूध उत्पादन झारखंड के मुकाबले लगभग 12.5 गुना ज्यादा बताया जाता है। पड़ोसी इलाकों में बिहार और पश्चिम बंगाल भी झारखंड से आगे निकल चुके हैं, जबकि ओडिशा इस तुलना में थोड़ा पीछे है
दूध कि उत्पादन तो बढ़ रहा है मगर फिर भी राज्य में दूध की प्रति व्यक्ति खपत राष्ट्रीय औसत से कम ही बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति मासिक खपत 2.563 लीटर दर्ज की गई है, और शहरी क्षेत्र में यह 4.458 लीटर तक सीमित रहती है। यह स्तर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कमजोर है, ऐसा कहा जा रहा है। राजधानी रांची की स्थिति यहाँ के बाकी जिलों से थोड़ी अलग नजर आती है। रांची में सालाना लगभग 3 लाख टन दूध का उत्पादन होता है , जो राज्य के कुल उत्पादन का करीब 10 प्रतिशत माना जाता है। रांची में प्रति व्यक्ति दूध की खपत भी राज्य के औसत से अधिक है। लेकिन यहां आबादी बढ़ने के साथ demand भी तेज होती जा रही है , इसलिए प्रतिदिन लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक दूध की आपूर्ति में कमी जैसी स्थिति बनी रहती है। ऐसे में, सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत करना, राज्य के लिए एक बड़ी और लगातार चुनौती बन चुका है।

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