बोकारो ट्रेजरी से 3 करोड़ 15 लाख की अवैध निकासी, पूर्व सांसद ने की CM के इस्तीफे की मांग
सरकारी खजाने के वेतन मद में करोड़ों रुपए की अवैध निकासी का यह सनसनीखेज मामला सब इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह से जुड़ा है. जिसमें सिर्फ 20 माह में 3 करोड़ 15 लाख की निकासी कर ली गई. कई गड़बड़ियां सामने आई हैं.

Jharkhand (Bokaro): झारखंड में एक पुलिस सब इंस्पेक्टर की सैलरी 35 हजार से शुरू होकर 1 लाख 12 हजार तक जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसी सब इंस्पेक्टर के पास मात्र 20 महीनों में 3 करोड़ 15 लाख रुपए जमा हो सकते है! ऐसा ही भ्रष्टाचार का नमूना पेश करता बोकारो से एक मामला सामने आया है. सरकारी खजाने के वेतन मद में करोड़ों रुपए की अवैध निकासी का यह सनसनीखेज मामला सब इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह से जुड़ा है. प्रधान महालेखाकार (पीएजी) चंद्रमौली सिंह द्वारा वित्त सचिव प्रशांत कुमार को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. ट्रेजरी के निरीक्षण के बाद पीएजी ने गुरुवार को सरकार को यह रिपोर्ट भेजी है.
आमतौर पर एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को करीब एक लाख रुपये वेतन मिलता है. लेकिन उपेंद्र सिंह के वेतन मद में मई 2024 से दिसंबर 2025 तक जो निकासी हुई, उसके अनुसार वेतन 15 लाख रुपये प्रति महीने से ज्यादा हो जाता है. खास बात यह है कि 3.15 करोड़ की निकासी पर जीपीएफ मद में सिर्फ 61,668 रुपये की कटौती की गई. वहीं आयकर और टीडीएस मद में कोई कटौती नहीं की गई है. सिस्टम में पुलिस सब इंस्पेक्टर का पे लेवल 7वें सीपीसी के लेवल-18 के बराबर दिखाया गया है, जो संभव ही नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेजरी इंस्पेक्शन और डेटा एनालिसिस के दौरान पेरोल प्रोसेसिंग, पे एंटाइटलमेंट और वैलिडेशन में बड़े पैमाने पर कंट्रोल गैप पाए गए हैं. बोकारो के अलावा अन्य ट्रेजरी में भी कुछ मामलों में दो बार वेतन निकाले जाने की भी आशंका है. यही नहीं, एक ही अवधि का भुगतान एक से अधिक बार किया गया.
जिम्मेदार अधिकारी कहते हैं- "ऐसी कोई चर्चा नहीं"
बोकारो के ट्रेजरी अफसर गुलाबचंद उरांव ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई है. उन्होंने कहा- एजी ऑफिस के सीनियर अकाउंट्स अफसर ने ट्रेजरी के निरीक्षण के बाद ऐसे किसी मामले की चर्चा नहीं की. वहीं कहा कि ऑफिस खुलने पर इसकी तहकीकात की जाएगी. नहीं भेजा गया ऐसा कोई बिल इस संबंध में सच जानने के लिए बोकारो एसपी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन पता चला कि वे अभी अवकाश पर हैं. निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी मुख्यालय डीएसपी अनिमेश गुप्ता ने कहा कि ऐसी कोई निकासी एसपी ऑफिस द्वारा नहीं की गई है. न ही ऐसा कोई बिल ट्रेजरी को भेजा गया है.
सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कई बातें सामने आई हैं. जिनमें-
- एक ही अवधि में कई बार डुप्लीकेट बिल भुगतान का शक.
- एक ही अवधि के लिए कई सैलरी बिल प्रोसेस किए गए.
- अलग-अलग ट्रेजरी वाउचर नंबरों से समान राशि बार-बार निकाली गई.
- 10.33 लाख, 10.27 लाख जैसी रकम कई बार क्लेम की गई.
- 20.03 लाख, 19.03 लाख जैसे बड़े भुगतान ओवरलैपिंग पीरियड में किए गए हैं.
- भुगतान का यह पैटर्न डुप्लीकेशन और ओवर पेमेंट की ओर इशारा करता है.
- जेड कैटेगरी शहरों में हाउस रेंट मद में 10% के बजाय 20% तक भुगतान.
- डीए में भी स्वीकृत 58% से अधिक दर पर भुगतान किया गया.
- बेसिक पे की गलत गणना की गई.
- मेडिकल अलाउंस में अलग-अलग दरों पर भुगतान हुआ.
पीएजी ने निर्देश दिए हैं कि जनवरी से मार्च तक का कर्मचारियों का डेटा साझा करें. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गड़बड़ी सिस्टम लेवल पर हुई है. पेरोल प्रोसेसिंग में वैलिडेशन की कमी पाई गई है. मास्टर डेटा की इंटीग्रिटी कमजोर है. पे एंटाइटलमेंट की गलत मैपिंग हुई है. डुप्लीकेट वाउचर रोकने का कोई प्रभावी मैकेनिज्म नहीं है. प्रधान महालेखाकार ने वित्त विभाग से कहा है कि जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक का एम्प्लॉई-वाइज डेटा नियमित रूप से साझा करें, ताकि गहराई से जांच की जा सके. इसके साथ ही पीएमयू सेल को भी निर्देश देने को कहा है, ताकि पूरे राज्य में एस्टैब्लिशमेंट खर्च की मॉनिटरिंग मजबूत हो सके. CM हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग पूर्व सांसद सूरज मंडल ने उक्त मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन से इस्तीफा देने की मांग भी की है, ताकि केंद्रीय एजेंसियां ट्रेजरी से अवैध निकासी के उस मामले पर निष्पक्षता से जांच कर सके. उनका कहना है कि सीएम के पद में रहते इसकी निष्पक्ष जांच होना संभव नहीं है.
रिपोर्ट: संजीव कुमार
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