सरकार 4.3% से 4.8% GDP घाटे की सीमा पर कर रही विचार
सरकार 4.3% से 4.8% GDP घाटे की सीमा पर कर रही विचार

ईरान में जारी युध्द और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्य को थोड़ा ढीला करने के बारे में सोच सकते है। सरकार ने फरवरी 2026 में पेश बजट में वित्तीय घाटा GDP के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का जो लक्ष्य रखा था, लेकिन हालात को देखते हुए ये आंकड़ा 4.8 प्रतिशत तक जा सकता है।
ईरान में चल रहे तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति के अटकने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को अस्तव्यस्त दिया है। कच्चा तेल महंगा हुआ तो भारत, जिसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात का सहारा बड़ा है, वहां तेल के भाव उछलने का असर सीधे सरकारी खर्च और आम आदमी के बजट पर पड़ेगा। ऊर्जा क्षेत्र में लगातार बढ़ती लागत के कारण सरकार पर ईंधन और गैस सब्सिडी का दबाव बढ़ गया है , साथ ही खाद सब्सिडी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। माना ये जा रहा है कि किसानों और उपभोक्ताओं को संभालने के लिए सरकार को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन भी लगाने पड़ सकते हैं।
इसी बीच सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो चुकी है । घरेलू रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी में कटौती के संकेत भी मिलने लगे हैं, इससे सामान्य परिवारों की जेब पर असर पड़ना लाजिमी माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के खर्च की फिर से जांच भी कर रही है। गैर-जरूरी परियोजनाओं और योजनाओं में कटौती जैसी सधी हुई बातों पर चर्चा चलती दिख रही है , हालांकि अंतिम निर्णय आर्थिक हालात और राजस्व वसूली की स्थिति देखकर ही आगे होगा।
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