ढोल-नगाड़ों की गूंज से गूंजा गिरिडीह, आदिवासी महोत्सव में दिखी संस्कृति की अनोखी झलक
महोत्सव की शुरुआत से पहले शहर में भव्य जुलूस निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के युवक और युवतियां शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक रंग में सजे इस जुलूस ने पूरे शहर का माहौल उत्सवमय कर दिया

Giridih: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर रविवार को गिरिडीह में आदिवासी महोत्सव पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। शहर से लेकर नगर भवन तक आदिवासी संस्कृति और परंपरा की खूबसूरत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए और पारंपरिक नृत्य-संगीत के जरिए अपनी संस्कृति का प्रदर्शन किया।
जुलूस में उमड़ा आदिवासी समाज, पारंपरिक वेशभूषा में दिखे युवक-युवतियां
महोत्सव की शुरुआत से पहले शहर में भव्य जुलूस निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के युवक और युवतियां शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक रंग में सजे इस जुलूस ने पूरे शहर का माहौल उत्सवमय कर दिया। जुलूस के दौरान आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिली और लोगों में खासा उत्साह नजर आया।
नगर भवन में दीप जलाकर हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
जुलूस के बाद नगर भवन में आदिवासी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप जलाकर की। मौके पर गिरिडीह के DC रामनिवास यादव, SP डॉ. विमल कुमार, महापौर प्रमिला मेहरा, DDC स्मिता कुमारी, डिप्टी मेयर, सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव और JMM जिला अध्यक्ष संजय सिंह समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
सामाजिक न्याय को लेकर जागरूकता जरूरी: DC
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए DC रामनिवास यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय को लेकर आदिवासी समुदाय को जागरूक करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के महापुरुषों ने हमेशा समुदाय को जागरूक और संगठित होने का संदेश दिया है। फूलो-झानो और चांद-भैरव जैसे महापुरुषों के संघर्ष और योगदान को याद करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़े रहने की बात कही।
संथाली नृत्य और झूमर ने बांधा समां
आदिवासी महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों का दिल जीत लिया। मंच पर एक से बढ़कर एक संथाली नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी समुदाय के युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ झूमर पेश किया। पारंपरिक गीत और नृत्य की प्रस्तुतियों पर पूरा नगर भवन तालियों से गूंज उठा।
महोत्सव के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत की ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का जमकर आनंद लिया।
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