रोजे का पहला दिन आज, क्या हैं इसके मायने? महत्व पर क्या कहता है कुरान-ए-पाक?
इस्लाम के पाक महीने की शुरुआत आज से हो चुकी है. पहला रोजा है आज, जिसकी खासियत को जानना बेहद आवश्यक है. भले आप किसी भी धर्म से ताल्लुक रखते हों.

Ramzan Day 1: इस्लाम में रमजान के पाक महीने में रखा जाने वाला रोजा इबादत के महत्वपूर्ण स्तंभ के तौर पर देखा जाता है. अमूमन इस्लाम को मानने वाले प्रत्येक व्यक्ति द्वारा रोजा रखा जाता है. रोजे का पहला दिन इसलिए रखा जाता है क्योंकि मान्यता है कि यह अल्लाह के आदेश का पालन है और आत्मिक शुद्धि की शुरुआत का प्रतीक है.
कैसे हुई रोजा रखने की शुरुआत?
पैगंबर मोहम्मद के समय 624 ई. में उनके आदेशानुसार चले आ रहे रोजा रखने की प्रथा की शुरुआत हुई थी. इसी दौरान रोजा को अनिवार्य किया गया. कुरआन में उल्लेख है कि इस्लाम से पहले की कौमों में भी उपवास की परंपरा थी. यहूदी और ईसाई धर्म में भी कई मौकों पर उपवास रखा जाता है.
जहां ईसाई धर्म को मानने वाले ईस्टर के 40 दिनों पहले Ash बुधवार के दिन उपवास रखते हैं. इसके अलावा Good Friday और एडवेंट आदि अवसरों पर भी उपवास की मान्यता होती है. वहीं यहूदी धर्म में Yom Kippur (योम किप्पुर) और Tisha B'Av (तिशा ब’आव) आदि अवसरों पर मानने वाले उपवास के नियम बरतते देखे जा सकते हैं. इन दोनों धर्मों के इतर यदि आप हिंदू धर्म की मान्यताओं पर नजर डालें तो अनेक ऐसे पर्व-त्योहार मिल जाएंगे जिसमें उपवास की मान्यता बहुत अधिक होती है. जिसमें से नवरात्रि, प्रत्येक महीने आने वाले हिंदी माह की एकादशी तिथि, अनंत चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा आदि पुण्य तिथियां सम्मिलित हैं.
क्या हैं इस्लाम के पांच स्तंभ?
शहादा (ईमान की गवाही), सलात (नमाज), जकात (दान), सौम (रोजा) और हज (तीर्थयात्रा) को इस्लाम धर्म के पांच स्तंभों में जगह दी गई है.
रमजान का महीना क्यों होता है इतना अहम
रमजान इस्लामी हिजरी कैलेंडर का नौवां महीना है और इसे रहमत, मगफिरत (क्षमा) और जहन्नम से निजात का महीना कहा गया है. इसकी खासियत कई कारणों से है: कुरआन का अवतरण, लैलतुल कद्र (शबे कद्र), रोज़ा और तकवा (परहेजगारी), तरावीह और सामूहिक इबादत एवं रहमत और माफी का महीना.
कुरआन के अवतरण शुरु होने का अर्थ
रमजान की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इस महीने से पाक कुरआन का अवतरण शुरु हुआ. कुरआन पहली बार फरिश्ते यानी जिब्रिल, जिसे गब्रियल भी कहा जाता है, के जरिए पैगंबर मुहम्मद पर उतारा गया. यह घटना सऊदी में मक्का के करीब गार-ए-हिरा नामक स्थान पर हुई थी. इन घटनाओं से शुरु होने के बाद 23 वर्ष की अवधि लगी जिस समयकाल में कुरआन पूरी तरह उतर सका. रमजान के महीने में ही आखिरी दस दिनों में आने वाली एक पवित्र रात होती है जिसे लैलतुल कद्र या शबे कद्र भी कहा जाता है. इसको लेकर मान्यता है कि यह रात हजार महीनों से भी बेहतर है.
कुरआन में रमजान के महत्व को बताते हुए उल्लेख किया गया है- "रमजान वह है जब कुरआन उतारा गया, यह लोगों के मार्गदर्शन का कार्य करता है". ठीक इसी प्रकार जैसे हिंदू धर्म में विशेष स्थान श्रीमद्भगवदगीता को प्रदान किया गया है.
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