झारखंड में हर तीसरी महिला कुपोषित, 28% का बाल विवाह, देखें रिपोर्ट
झारखंड में महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। 29.2% महिलाएं कुपोषित, 28% युवतियों का बाल विवाह और 11.7% किशोरियां गर्भवती या मां बन चुकी हैं।

Jharkhand News ; झारखंड में महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और किशोरावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में लगभग हर तीसरी महिला (29.2 प्रतिशत) कुपोषण और बेहद कम वजन की शिकार है, जबकि 16.9 प्रतिशत महिलाएं अत्यधिक वजन और मेटाबॉलिक जोखिमों से जूझ रही हैं। यही नहीं, 20-24 वर्ष आयु वर्ग की 28 प्रतिशत युवतियों का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में ही हो गया, वहीं 11.7 प्रतिशत किशोरियां या तो गर्भवती हैं या मां बन चुकी हैं। ये आंकड़े बुधवार को रांची में झारखंड सरकार और 'चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट' (CINI) के संयुक्त तत्वावधान में 'प्री कंसेप्शन केयर' (गर्भधारण पूर्व देखभाल) विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय परामर्श बैठक में जारी किए गए।
गर्भधारण से पहले की देखभाल पर जोर, किशोरावस्था से ही स्वास्थ्य पर ध्यान
बैठक में विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से जोर दिया कि गर्भावस्था के दौरान ही नहीं, बल्कि गर्भधारण से पहले ही महिला की स्वास्थ्य देखभाल को राज्य की मुख्य स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि एक स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे की नींव गर्भावस्था के दौरान नहीं, बल्कि उससे काफी पहले ही रखी जाती है। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था से ही लड़कियों के पोषण, एनीमिया (खून की कमी) की रोकथाम, मानसिक व प्रजनन स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है।
समय पर स्क्रीनिंग, उपचार और फॉलोअप जरूरी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) झारखंड के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि महिला स्वास्थ्य सुधार के लिए केवल जागरूकता फैलाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समय पर बीमारियों की स्क्रीनिंग, सटीक उपचार, निरंतर परामर्श और नियमित फॉलोअप की मजबूत व्यवस्था बेहद जरूरी है। वहीं सिनी (CINI) के चीफ ऑफ प्रोग्राम्स मेघेंद्र बनर्जी ने कहा कि बेहतर मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य के परिणामों के लिए 'प्री कंसेप्शन केयर' को लेकर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिशानिर्देश और सख्त कार्यान्वयन ढांचा तैयार करना समय की मांग है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल संरक्षण को जोड़कर बनेगी गाइडलाइन
राज्यस्तरीय परामर्श बैठक में सिनी द्वारा संचालित समुदाय-आधारित मॉडल, शोध आंकड़ों और झारखंड के मैदानी अनुभवों को साझा किया गया। उपस्थित विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से सिफारिश की कि इन चिंताजनक आंकड़ों से निपटने के लिए स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन, शिक्षा और बाल संरक्षण कार्यक्रमों को आपस में जोड़कर एक व्यापक राज्यस्तरीय दिशानिर्देश (State Guidelines) जल्द से जल्द तैयार की जाए।
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