विश्व आदिवासी दिवस पर टाउन हॉल में सजी आदिवासी संस्कृति की रंगारंग तस्वीर
उपायुक्त ने कहा- आदिवासी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली से समाज बहुत कुछ सीख सकता है; खेल, शिक्षा एवं कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट 9 बच्चे सम्मानित

Medinagar Palamu। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पलामू जिला प्रशासन की ओर से रविवार को मेदिनीनगर स्थित टाउन हॉल में विश्व आदिवासी दिवस सांस्कृतिक कार्यक्रम-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम से पूर्व अतिथियों ने विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए आकर्षक स्टॉलों का भ्रमण किया और आदिवासी संस्कृति, कला, परंपरा, पारंपरिक उत्पादों एवं जनजातीय जीवन से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उपायुक्त ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराएं और जीवनशैली हमारी समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आदिवासी संस्कृति से समाज बहुत कुछ सीख सकता है। प्रकृति के साथ सामंजस्य, जल-जंगल-जमीन के प्रति संवेदनशीलता, सामुदायिक सहयोग और अपनी परंपराओं के संरक्षण की भावना आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान है। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास, कला-संस्कृति और समाज में उनके योगदान को जानने-समझने का अवसर प्रदान करता है। नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, इतिहास एवं परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिलता है। खेल, शिक्षा और कला में उत्कृष्ट 9 बच्चे सम्मानित कार्यक्रम के दौरान खेल, शिक्षा, कला एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 9 आदिवासी बच्चों को सम्मानित किया गया। उपायुक्त ने सभी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने बच्चों को निरंतर मेहनत कर अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों एवं कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। मनातू के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के बच्चों ने आधुनिक युग में आदिवासी बच्चों के जीवन पर आधारित प्रस्तुति दी, जिसमें परंपराओं, बदलते समय और आधुनिक दौर में बच्चों के जीवन में आए बदलावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। वहीं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने "धरती के मूल निवासी, देश की शान आदिवासी" गीत प्रस्तुत कर पूरे टाउन हॉल को गूंजायमान कर दिया। छात्राओं की शानदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। इसके अलावा नीलांबर-पीतांबर के जीवन एवं संघर्ष पर आधारित नाटक भी प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से झारखंड के वीर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान एवं बलिदान को दर्शाया गया। आदिवासी लोकनृत्य, नागपुरी नृत्य एवं अन्य पारंपरिक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी ऑडियो-वीडियो प्रस्तुतियां भी प्रदर्शित की गईं। विभिन्न विद्यालयों एवं कलाकारों की प्रस्तुतियों से टाउन हॉल का माहौल पूरी तरह आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग गया। विभिन्न विभागों के स्टॉल रहे आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम स्थल पर जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों की ओर से आकर्षक स्टॉल लगाए गए। स्टॉलों के माध्यम से विभागीय योजनाओं, आदिवासी कला-संस्कृति, पारंपरिक उत्पादों एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी दी गई। अतिथियों और उपस्थित लोगों ने स्टॉलों का भ्रमण कर प्रदर्शित सामग्री एवं योजनाओं की जानकारी ली।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त सादात अनवर, वन प्रमंडल पदाधिकारी सत्यम कुमार, अपर समाहर्ता कुंदन कुमार सहित जिला प्रशासन के पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मी, शिक्षक, विद्यार्थी, कलाकार एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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