छह साल बाद लिपुलेख दर्रे से फिर शुरू होगा सीमा व्यापार
लिपुलेख दर्रे से 26 भारतीय व्यापारी 26 जून को तिब्बत में करेंगे प्रवेश

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर भारत-चीन सीमा व्यापार छह साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, 26 जून को 26 भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत में प्रवेश करेगा। इस दल में 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं। व्यापार के लिए 26 पास जारी किए गए हैं। व्यापार प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गुंजी में कस्टम कार्यालय भी खोला गया है। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 में बंद हुआ यह व्यापार अब दोबारा शुरू हो रहा है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों में उत्साह है।
धारचूला के उप-जिलाधिकारी और व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि व्यापारी पहले ही लिपुलेख दर्रे के पास स्थित गांवों के गोदामों में अपना सामान रख चुके हैं। प्रशासन को 103 से अधिक व्यापारियों के आवेदन मिले हैं। इसके बाद दूसरे चरण में 25 और व्यापारियों को व्यापार पास जारी करने की तैयारी की जा रही है। व्यापारियों की सुविधा के लिए नाभीढांग के पास खच्चरों और घोड़ों के जरिए सामान पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है। यह स्थान लिपुलेख दर्रे से करीब 600 मीटर दूर है।
भारत-चीन सीमा व्यापार पहली बार 1991 में फिर शुरू हुआ था, लेकिन महामारी के चलते इसे रोक दिया गया था। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकली ने कहा कि तिब्बत पहुंचने के बाद व्यापारी सबसे पहले छह साल पहले वहां रखे गए सामान की स्थिति की जांच करेंगे। यदि सामान को नुकसान पहुंचा है तो उसका आकलन करने के बाद सरकार से राहत पैकेज की मांग की जा सकती है। व्यापार बहाल होने से सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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