बिहार में परीक्षा माफिया पर बड़ा शिकंजा! 4 परीक्षाओं की गड़बड़ी अब ED के रडार पर
बिहार में कथित पेपर लीक मामलों की जांच का दायरा बढ़ने की खबर है। TRE-3, NEET 2024, CHO 2025 और AEDO 2026 से जुड़े मामलों में अब कथित वित्तीय लेन-देन और परीक्षा माफिया के नेटवर्क की जांच पर भी फोकस रहने की बात सामने आई है।


बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी के मामलों को लेकर जांच का दायरा बढ़ता दिख रहा है। जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2024 और उसके बाद हुई कुछ परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की है। इनमें TRE-3, NEET 2024, CHO 2025 और AEDO 2026 का नाम सामने आ रहा है।
अब तक इन मामलों में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर जांच होती रही है, लेकिन ED की एंट्री के बाद जांच का फोकस कथित पैसों के लेन-देन और उससे जुड़े नेटवर्क पर भी जा सकता है।
संजीव मुखिया से जुड़े मामले की भी जांच
ED पहले से परीक्षा माफिया संजीव मुखिया से जुड़े मामले की जांच कर रही है। अब 2024 के बाद हुई दूसरी परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों को भी जांच के दायरे में लाए जाने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि पेपर लीक के पीछे किसी संगठित गिरोह की भूमिका थी या नहीं और अगर थी, तो इस पूरे नेटवर्क में पैसों का लेन-देन किस तरह हुआ। यानी मामला सिर्फ प्रश्नपत्र लीक होने तक सीमित नहीं रह सकता। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि कथित तौर पर इस नेटवर्क से कितनी रकम जुड़ी थी, पैसा कहां से आया और किन लोगों तक पहुंचा।
जिन परीक्षाओं का नाम सामने आया है, उनमें 2024 की TRE-3 शिक्षक भर्ती परीक्षा, NEET 2024, CHO परीक्षा 2025 और AEDO परीक्षा 2026 शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए जांच के दौरान यह स्पष्ट होना बाकी है कि इन मामलों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार भी कर चुकी है बड़ा ऐलान
बिहार में लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी शिकायतों के बीच सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार की बात पहले ही कह चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीक आधारित बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति गठित करने की घोषणा की थी। सरकार की कोशिश पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के साथ परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने की है।
अब ED की जांच आगे बढ़ती है तो यह देखना अहम होगा कि चारों परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की असली कड़ी कहां तक जाती है और क्या इनके पीछे कोई साझा वित्तीय नेटवर्क सामने आता है।

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