दुमका में फिर शुरू हुई जल, जंगल और जमीन की लड़ाई, बादलपाड़ा में बिना ग्रामसभा कोल टेस्टिंग का विरोध, अंचल दफ्तर घेरा
दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड में एक बार फिर 'जल, जंगल और जमीन' की रक्षा को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है।


Dumka: दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड में एक बार फिर 'जल, जंगल और जमीन' की रक्षा को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। बादलपाड़ा और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण प्रस्तावित कोयला खदान और इलाके में चल रही कोल टेस्टिंग के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि शिकारीपाड़ा के अंचल अधिकारी (सीओ) कपिलदेव ठाकुर नियमों को ताक पर रखकर कंपनी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं और जबरन खदान खुलवाने के लिए इलाके में कोल टेस्टिंग करवा रहे हैं। इसके विरोध में ग्रामीणों ने लाल झंडा थामकर अंचल कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी व प्रदर्शन किया।
बिना ग्रामसभा के कोल टेस्टिंग का विरोध, महिलाओं से बदसलूकी का आरोप
झारखंड भारतीय खेत मजदूर यूनियन एवं झारखंड ग्रामीण मजदूर संघ के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में ग्रामीणों ने कहा कि पारंपरिक नियमों के मुताबिक बिना ग्रामसभा की अनुमति के किसी भी बाहरी कंपनी का गांव में प्रवेश वर्जित है। इसके बावजूद प्रशासन ग्रामीणों की सहमति लिए बिना जबरन डीप बोरिंग कर जांच प्रक्रिया चला रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर ग्रामीणों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे पत्थर खदानों के प्रदूषण और विस्थापन का दंश पहले से झेल रहे हैं, अब अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर कोयला खदान के लिए नहीं देंगे।
ग्रामीणों के समर्थन में उतरे माले नेता, सड़क से सदन तक लड़ाई की चेतावनी
ग्रामीणों के इस आंदोलन को धार देने के लिए भाकपा-माले के कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे। सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो और राजधनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। नेताओं ने कहा कि अधिकारियों द्वारा आदिवासियों और मूलवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कुचलने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर ग्रामीणों पर झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने और जबरन जमीन हथियाने की कोशिशें बंद नहीं हुईं, तो यह लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ी जाएगी। आंदोलन में माले केंद्रीय समिति सदस्य गीता मंडल, पलटन हांसदा और सुभाष मंडल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।

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