विश्व आदिवासी दिवस पर रांची में अधिवक्ताओं की पदयात्रा, परिसीमन के खिलाफ उठी आवाज
विश्व आदिवासी दिवस पर रांची में जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं और समाजसेवियों ने पदयात्रा निकाली। परिसीमन के विरोध में आवाज उठाते हुए आदिवासी अधिकारों और संवैधानिक हितों की रक्षा का संकल्प लिया।

Ranchi: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर शनिवार को राजधानी रांची में आदिवासी अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर आवाज बुलंद हुई। रांची जिला बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं और समाजसेवियों ने पदयात्रा निकाली। पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिला अधिवक्ता, अधिवक्ता संघ के सदस्य और समाजसेवी शामिल हुए।
अल्बर्ट एक्का को श्रद्धांजलि देकर शुरू हुई पदयात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद अधिवक्ताओं और समाजसेवियों ने पदयात्रा निकाली। इस दौरान प्रतिभागियों ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आदिवासी समाज की एकता, अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश दिया।
परिसीमन को लेकर अधिवक्ताओं ने जताई चिंता
पदयात्रा के दौरान अधिवक्ताओं ने आदिवासी समाज से जुड़े कई मुद्दों को लेकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी हितों से जुड़े मामलों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
वक्ताओं ने प्रस्तावित परिसीमन को लागू नहीं करने की मांग की। उनका कहना था कि परिसीमन लागू होने से आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में आदिवासी समाज के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए किसी भी फैसले पर विचार किया जाना चाहिए।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में अधिवक्ताओं और समाजसेवियों ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का संकल्प लिया।
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