सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र का अनोखा प्रयोग: 20 टन कोयले की राख से रच दी मां सरस्वती की भव्य कलाकृति
बिहार के रहने वाले देश के नामचीन सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार सरस्वती पूजा के अवसर पर बनाए अपने कोयले की राख का प्रयोग कर बनाई सरस्वती मां की प्रतिमा के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं. 15 फीट ऊंची और 20 हजार किलो कोयले की राख से निर्मित यह कलाकृति सोशल मीडिया पर भी खूद चर्चाएं बटोर रही हैं.

Bihar (Motihari): आज पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम से सरस्वती पूजा का त्योहार मनाया जा रहा है. एक ओर स्कूलों, संस्थानों और क्लबों में लोग भक्ति भाव से मां शारदा की पूजा अर्चना में लीन हैं, तो वहीं दूसरी ओर बिहार में भारत के चर्चित अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने कोयला के राख से मां शारदा की अद्भुत दिव्य कलाकृति बनाई हैं.
15 फीट ऊंची है मां सरस्वती की यह कलाकृति
कभी समुद्र तट पर तो कभी पीपल के हरे पत्तों पर अपनी अनोखी कलाकारी से दुनिया भर में पहचान बना चुके हैं अंतर्राष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र. इस बार सरस्वती पूजा के अवसर पर मधुरेंद्र ने 20 टन (20,000 किलोग्राम) कोयले की राख का उपयोग कर करीब 15 फीट ऊंची मां सरस्वती की भव्य आकृति का निर्माण किया है. सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र के इस अनोखा प्रयोग से ऐसा लग रहा है मानो कोयले की राख में मां शारदा साक्षात प्रकट हो आई हैं. इस कलाकृति के माध्यम से उन्होंने “सरस्वती पूजा” का शुभ संदेश भी अंकित किया. सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र की यह कलाकृति सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई हैं.

देना चाहते हैं विश्व शांति का संदेश: मधुरेंद्र
इस अद्भुत रचना में मां सरस्वती को वीणा धारण किए हुए हंस की सवारी करते हुए दर्शाया गया है, वहीं पास में मोर की मनोहर आकृति भी उकेरी गई है. कलाकार मधुरेंद्र ने बताया कि इस कलाकृति के जरिए वे ज्ञान, रचनात्मकता और विश्व शांति का संदेश देना चाहते हैं.

कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मान और वर्ल्ड रिकॉर्ड से हो चुके हैं सम्मानित
रेतकला के जादूगर के रूप में विख्यात मधुरेंद्र कुमार प्राकृतिक आपदाओं, समसामयिक घटनाओं और ज्वलंत सामाजिक विषयों पर अपनी कला के माध्यम से सकारात्मक संदेश देने के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं. अपनी विशिष्ट और नवाचार कला के दम पर वे अब तक 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं. वे ऐसे पहले भारतीय कलाकार हैं जिन्हें लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और हाल ही में बौद्ध महोत्सव के अवसर पर भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित 50 रेत की प्रतिमा के निर्माण के लिए यूनाइटेड नेशन (यूएन) बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान मिल चुका है.
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