Nitish Kumar resigns: बिहार के दो दशकों से मुख्यमंत्री का पद संभल रहे नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया है. बिहार की इस राजनीतिक उलटफेर में सबसे बड़ा यह सवाल अभी चर्चा का विषय बना हुआ है कि सीएम की कुर्सी पर बैठने वाला अगला नेता कौन होगी?
नीतीश कुमार ने हाल ही में हुए बिहार चुनाव में चुनाव नहीं लड़ा. इसलिए वे विधायक नहीं हैं. वे विधान परिषद के सदस्य बने हुए थे. मुख्यमंत्री बनने के लिए किसी भी नेता को राज्य की विधानसभा या विधान परिषद के किसी भी सदन का सदस्य होना आवश्यक है. विधान परिषद राज्य स्तर पर राज्यसभा के समकक्ष है.
वहीं दूसरी ओर उनके इस्तीफे के बाद बिहार के सीएम पद की रेस तेज हो गई है. अधिक चर्चाएं इसी ओर संकेत करती नजर आ रही हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी अपनी पार्टी से ही खड़ा करेगी.
मुख्यमंत्री पद से अभी नहीं दिया है इस्तीफा
एक सवाल यह भी सामने आता है कि क्या अभी नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे? हम स्पष्ट कर दें कि बिल्कुल अभी बिहार के सीएम नीतीश ही रहेंगे, तब तक जब तक वे मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा नहीं दे देते. भले ही उन्होंने राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया हो, उनके पास सीएम का टैग बरकरार है.
खबरों के मुताबिक, नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. हालांकि, अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
20 मार्च को बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री शरवन कुमार ने बताया था कि हाल ही में हुए चुनावों में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बावजूद नीतीश कुमार अगले छह महीनों तक अपने पद पर बने रह सकते हैं.
नियमों में क्या लिखा है?
भारत के संविधान का अनुच्छेद 164(4) लचीलापन प्रदान करता है, जिसके तहत कोई व्यक्ति राज्य विधानमंडल या परिषद का सदस्य न होते हुए भी छह महीने की अवधि के लिए मुख्यमंत्री या मंत्री के रूप में कार्य कर सकता है. यह प्रावधान नीतीश कुमार को संसद में सत्ता हस्तांतरण के बाद भी कम से कम छह महीने तक अस्थायी रूप से पद पर बने रहने की अनुमति देता है.
एमएलसी पद से नीतीश के इस्तीफे के बाद, अब सबकी निगाहें उनके उत्तराधिकारी पर टिक गई हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में दो दशकों से अधिक समय के बाद यह बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे सकता है.
कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में वापसी से बिहार सरकार में भाजपा की भूमिका बढ़ सकती है और संभवतः वह मुख्यमंत्री पद पर भी दावा कर सकती है. इस दौड़ में सबसे आगे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं.
नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर पर एक नजर
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर गठबंधन की रणनीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो वैचारिक बदलावों की एक श्रृंखला से चिह्नित है. 1985 में एक विधायक के रूप में अपने सफर की शुरुआत करने और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य करने के बाद, वे पहली बार 2005 में एनडीए के सहयोगी के रूप में बिहार के मुख्यमंत्री बने.
हालांकि, 2013 से उनका कार्यकाल गठबंधनों के लगातार बदलते रहने से परिभाषित हुआ है, जो 2013, 2017, 2022 और 2024 में भाजपा और महागठबंधन (आरजेडी और कांग्रेस) के बीच बारी-बारी से बदलते रहे. इन्हीं बदलते गठबंधनों के कारण विपक्ष उन्हें 'पलटू राम' कहकर संबोधित करने लग गई. इन लगातार बदलावों के बावजूद, उनकी राजनीतिक स्थिरता बेजोड़ बनी रही. हाल ही में, उन्होंने 2025 में पांचवीं बार भारी चुनावी जीत हासिल की और उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ दसवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.









