₹5.07 लाख करोड़ के कर्ज में घिरा Kerala, सरकार के सामने बड़ी चुनौती
₹5.07 लाख करोड़ के कर्ज में घिरा केरल, सरकार के सामने बड़ी चुनौती


कर्ज और खर्च वाले दवाब में केरल की अर्थव्यवस्था, श्वेत पत्र ने फिर से चिंता बढ़ाई… किसी तरह की राहत नहीं लग रही है। केरल की वित्तीय हालत को लेकर जारी श्वेत पत्र ने राज्य की आर्थिक सेहत पर कुछ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, रिपोर्ट के अनुसार राज्य पर कुल ₹5.07 लाख करोड़ की देनदारियां हैं, और दूसरी तरफ उसकी कुल राजस्व प्राप्तियों का 77 प्रतिशत भाग वेतन, पेंशन , ब्याज और प्रशासनिक खर्चों जैसी प्रतिबद्ध मदों में चला जा रहा है। नतीजा ये कि विकास योजनाएं, नई परियोजनाओं के लिए सरकार के पास संसाधन कम पड़ते जा रहे हैं, धीरे धीरे।
श्वेत पत्र में ये भी कहा गया है कि राज्य की कमाई का बड़ा हिस्सा उन खर्चों में फंस चुका है, जिन्हें तुरंत घटाना संभव नहीं है। उदाहरण के लिए सरकारी कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज पर होने वाले ब्याज भुगतान शामिल हैं । इसी वजह से बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी स्कीमों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और बजट की सांस सिमटती दिखती है।
सबसे बड़ी बेचैनी ब्याज भुगतान को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की कुल आय का लगभग 20.9 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पुराने कर्ज के ब्याज को चुकाने में खर्च होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये सिलसिला चलता रहा तो सरकार को पुराना कर्ज उतारने के लिए नया कर्ज लेना पड़ सकता है ।और ऐसे में वित्तीय बोझ और भारी बन जाएगा । श्वेत पत्र की तरफ से चेतावनी दी गई है कि अगर वित्तीय आधार को मजबूत नहीं किया गया, तो केरल का सामाजिक विकास मॉडल प्रभावित हो सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में राज्य की जो उपलब्धियां रही हैं उन्हें कायम रखना भी चुनौती बन सकती है।
वित्तीय स्थिति संभालने के लिए टैक्स संग्रह बढ़ाने, जीएसटी लीकेज को रोकने, गैर-जरूरी खर्चों में कटौती और महंगे कर्ज के पुनर्गठन जैसे कदम सुझाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सुधार न किए गए तो आने वाले सालों में राज्य की आर्थिक परेशानियां और गहरी हो सकती हैं, और फिर हालात सँभालना कठिन होगा।

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