मात्र 50 रूपये में घर से सांपों को रखें दूर, बिहार विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने बनाया स्नेक डिटेक्टर, बैरियर को मिल गया पेटेंट
‘स्नेक डिटेक्टर बैरियर’ जंग-प्रतिरोधी माइल्ड स्टील से बने डुअल लेयर रिपेलेंट स्टेशन पर आधारित है. जो एक सेल्फ केयर यूनिट की तरह काम करता है. इसके ऊपरी चेंबर में लगभग 300 ग्राम कंकड़ या रेत और 20 एमएल कार्बोलिक एसिड के साथ लौंग और सिट्रोनेला का तेल भरा जाता हैं.

Bihar(Muzaffarpur): अगर आपको सांपों से डर लगता है तो अब आप मात्र 50 रूपये महीने का खर्च कर अपने घर और गोदाम को सांपों की पहुंच से दूर रख सकते हैं. बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. मनेंद्र कुमार और पीजी जूलॉजी विभाग के डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद सिंह के बनाए स्नेक डिटेक्टर बैरियर अब सर्पदंश से सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सांपों के संरक्षण में भी सहायक साबित होगा.
यूके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज ऑफिस से पेटेंट भी है हासिल
इस स्नेक डिटेक्टर बैरियर को बनाने के बाद बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. मनेंद्र कुमार और पीजी जूलॉजी विभाग के डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद सिंह ने इस उपकरण के डिजाइन को यूके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज ऑफिस से पेटेंट भी हासिल कर लिया है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान भी प्राप्त हुई है.
कंक्रीट पर मिट्टी में मजबूती से लगाया जा सकता है स्टेशन
‘स्नेक डिटेक्टर बैरियर’ जंग-प्रतिरोधी माइल्ड स्टील से बने डुअल लेयर रिपेलेंट स्टेशन पर आधारित है. प्रत्येक स्टेशन एक सेल्फ केयर यूनिट की तरह काम करता है. इसके ऊपरी चेंबर में लगभग 300 ग्राम कंकड़ या रेत और 20 एमएल कार्बोलिक एसिड के साथ लौंग और सिट्रोनेला का तेल भरा जाता हैं. इसके बाद रासायनिक अभिक्रिया से निकलने वाली तीखी गंध स्टेशन में बने दो–तीन छेद से नियंत्रित रूप से फैलती है, जिससे निर्धारित सीमा के भीतर सांप प्रवेश नहीं कर पाता है. गंध कम होने पर सिस्टम में लगी एलईडी और वायरलेस सिग्नल के माध्यम से अलर्ट मिलता है. ठंडे मौसम में गंध के बेहतर प्रसार के लिए सोलर हीट प्लेट भी लगाया गया है. स्टेशन को कंक्रीट पर बोल्ट या स्टैंड-माउंटेड फ्रेम के जरिए मिट्टी में मजबूती से लगाया जा सकता है.
15 से 30 दिनों में होती है रिफिलिंग की जरूरत
इस उपकरण की अनुमानित लागत करीब 1500 रुपये है. एक बार मिश्रण भरने के बाद 15 से 30 दिनों में रिफिलिंग की जरूरत होती है, जिस पर मात्र 40–50 रुपये का खर्च आता है. प्राकृतिक रसायनों पर आधारित होने के कारण यह प्रणाली पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी आसानी से स्थापित की जा सकती है.
सर्पदंश से देश में हर साल होती हैं करीब 60 हजार मौतें
स्नेक डिटेक्टर बैरियर के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. मनेंद्र कुमार ने बताया कि भारत में सांपों की लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 30 प्रतिशत विषैले हैं. इसके बावजूद सर्पदंश से देश में हर साल करीब 60 हजार मौतें होती हैं, जो विश्वभर में होने वाली कुल मौतों का आधे से अधिक है. जबकि 70 प्रतिशत विषहीन सांप होने के बावजूद लोग डर के कारण विषहीन सांपों को भी मार देते हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा बढ़ता है.
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