'सिर्फ धक्का-मुक्की दुष्कर्म का प्रयास नहीं!, High Court का बड़ा फैसला, आरोपी की सजा...
यह पूरा मामला पलामू जिले का है और घटना वर्ष 2005 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अपने खेत में जानवरों के लिए चारा काट रही थी। उसी दौरान आरोपी शंकर राम वहां पहुंचा और उसने अचानक महिला को पकड़कर जमीन पर गिरा दिया।

Jharkhand High Court : झारखंड High Court ने दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले में बेहद अहम कानूनी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला के साथ केवल मारपीट या धक्का-मुक्की करने को अपने-आप में दुष्कर्म के प्रयास (Attempt to Rape) का अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस गंभीर धारा के तहत दोषी ठहराने के लिए आरोपी की ओर से दुष्कर्म करने की नीयत और दिशा में कोई स्पष्ट, सीधा और ठोस कृत्य होना अनिवार्य है। High Court के जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी शंकर राम की पूर्व में तय दोषसिद्धि को बदल दिया। अदालत ने उसे IPC (भारतीय दंड संहिता) के तहत दुष्कर्म के प्रयास के बजाय धारा 354 के तहत महिला की गरिमा और लज्जा भंग करने के अपराध का दोषी माना है।
पलामू में चारा काटने के दौरान खेत में हुई थी धक्का-मुक्की
यह पूरा मामला पलामू जिले का है और घटना वर्ष 2005 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अपने खेत में जानवरों के लिए चारा काट रही थी। उसी दौरान आरोपी शंकर राम वहां पहुंचा और उसने अचानक महिला को पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। महिला किसी तरह उसके चंगुल से छूटकर भागी, लेकिन आरोपी ने उसे दोबारा दौड़ाकर पकड़ लिया और धान के खेत में धक्का दे दिया। महिला के लगातार शोर मचाने और चीखने-पुकारने पर आरोपी डरकर मौके से भाग निकला था।
पंचायत के बाद दर्ज हुई थी FIR, कोर्ट ने तय किए कानूनी मायने
वारदात के बाद पीड़िता ने घर पहुंचकर अपने परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई। शुरुआत में गांव स्तर पर पंचायत बुलाई गई, लेकिन बात नहीं बनने पर पुलिस में विधिवत FIR दर्ज कराई गई। निचली अदालत द्वारा पूर्व में आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास का दोषी ठहराया गया था, जिसे आरोपी ने High Court में चुनौती दी थी। अब High Court ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण करते हुए साफ किया कि घटना में छीना-झपटी और धक्का-मुक्की तो साबित होती है, लेकिन दुष्कर्म की दिशा में कोई सीधा कदम नहीं दिखा। इसके आधार पर अदालत ने धारा में बदलाव करते हुए आरोपी को लज्जा भंग करने का दोषी करार दिया।
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